बलिया में जीपीएफ घोटाले में हर कदम पर नया पेंच, फंसेंगे कई माननीय

बलिया (ब्यूरो)- उच्च न्यायालय की सख्ती पर शुरू जिले के चर्चित जीपीएफ घोटाले की जांच का ऊंट किस करवट बैठेगाइस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा। क्योंकि इस घोटोले में न सिर्फ छोटे कर्मचारीबल्कि ऊपर’ बैठे अधिकारियों की भी गर्दन फंस रही है। वैसे जांच में अचानक आई तेजी से यह भी तय हो चला है कि पूर्ववर्ती जांचों का हश्र इस बार नहीं होने वालाक्योंकि कारण कि न्यायालय ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट 08 अगस्त को तलब किया है। इसको देखते हुए गुरुवार से जेडी की टीम जिविनि कार्यालय व कोषागार में पत्रावली तलाश रही है।

जिले के 40 अनुदानित इंटर कालेजों में वर्ष 1994-95 में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक आर गणेश ने जुगाड़ के दम न सिर्फ 379शिक्षकों की भर्ती कीबल्कि इनका वेतन भुगतान भी जीपीएफ से दिया जाने लगा। जीपीएफ घोटाला का जिन्न तब सामने आयाजब कुछ पुराने शिक्षकों ने जीपीएफ से अपना पैसा निकालने के लिए आवेदन किया। फिर कहना ही क्या थादो दर्जन याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल हो गयी।

इसकी जांच करते हुए महेश प्रधान ने वर्ष 2002 में 104 शिक्षकों के वेतन पर रोक लगा दिया। लेकिन वर्ष 2005-06 में तत्कालीन डीआईओएस बृजनाथ पांडेय ने पुन: 104 शिक्षकों का वेतन भुगतान जीपीएफ से करना शुरू कर दिया। वर्ष 2010 में भीम सिंह ने जीपीएफ मद से लगभग 12 करोड़ रुपये वेतन भुगतान किये जाने के विरोध में याचिका दाखिल करते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद भी विभाग वर्ष 2011 में भी वेतन भुगतान जारी रखा। इस बीचदायर दूसरी याचिका में उक्त धनराशि को 22 करोड़ बताया गया है। 31 जुलाई को न्यायाधीश अरूण टंडन व ऋतुराज अवस्थी की अदालत ने न सिर्फ अधिकारियों को फटकार लगायाबल्कि 08 अगस्त तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर कोर्ट को अवगत कराने का आदेश भी दिया।

कोर्ट ने यहां तक पूछा कि सीबीसीआईडी व विजिलेंस द्वारा घोटाला प्रमाणित होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुईबता दे कि जांच टीम ने 09 जिम्मेदारों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया। कोर्ट ने प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की भी मंशा जाहिर की है। कोर्ट की सख्ती से विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ गयी है। गुरुवार से विभाग व कोषागार में सम्बंधित पत्रावली तलाश रही जेडी की टीम ने शुक्रवार को भी खूब पसीना बहाया। सूत्रों की माने तो जीपीएफ घोटाले के हर कदम पर नया पेंच फंस रहा हैक्योंकि घोटाले की आंच में कई डीआईओएस के अलावा आजमगढ़ व इलाहाबाद में उच्च पदस्थ अधिकारी भी झुलसते नजर आ रहे है।

 

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