नया तहसील भवन बनकर लगभग तैयार

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बांगरमऊ/उन्नाव(ब्यूरो)- लगभग तीन वर्षों से मांगे के भवन में चल रही तहसील अब जल्दी ही अपने भवन में पहुंच जाएगी ।नई तहसील का भवन लगभग बनकर तैयार हो गया है और बस अब अधिकारियों की स्वीकृति शेष रह गई है। स्वीकृत मिलते ही बांगरमऊ तहसील का संचालन अपने भवन से होने लगेगा। बनाया गया भवन जनपद की अन्य तहसीलों के भवन से काफी अच्छा है और देखने मात्र से ही पता चल जाता है कि यहां पर कोई उच्च अधिकारी का कार्यालय स्थित है।

बताते चलें कि सफीपुर तहसील को तोड़कर बांगरमऊ तहसील बनाने में उच्च न्यायालय के अधिवक्ता व यसभारती सम्मान से सम्मानित फारुक अहमद की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने उच्च न्यायालय में नव दिसंबर बारह को एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दायर कर सफीपुर तहसील को तोड़कर बांगरमऊ तहसील बनाने की मांग की थी। जिस पर ग्यारह दिसंबर बारह को सुनवाई हुई और सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि 87 की पालिसी के अनुसार तहसील बनाने के लिए 100 से 120 हल्का लेखपालों की आवश्यकता होती है जबकि सफीपुर तहसील में 102 हल्का लेखपाल ही है| जिससे बांगरमऊ तहसील बनाना मानक के अनुरूप नहीं आता है और सफीपुर तहसील को तोड़ा नहीं जा सकता है। जिसके जवाब मेँ अहमद अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय को बताया कि 12 अक्टूबर 94 को 12 हलका लेखपाल से ही सैफई को तहसील बना दिया गया, 35 हल्का लेखपाल पर सिरौली बाराबंकी में तहसील बना दी गई, इटावा में भरथना आदि कई तहसीलों का गठन मानक के अनुसार न करते हुए नियमों में शिथिलता बरतते हुए नयी तहसीलों का गठन किया जा चुका है ।

इस तर्क पर 11 दिसंबर 12 को अधिवक्ता ने मांग की मानक में शिथिलता कर बनाई गई| नयी तहसीलों को भी या तो राज्य सरकार खत्म करे या फिर बांगरमऊ को तहसील बनाने का आदेश करें। न्यायालय के रुख को देखते हुए प्रदेश सरकार ने हड़बड़ी में 27 नवंबर 11 को बांगरमऊ में एक जनसभा का आयोजन कर सरकार के तत्कालीन राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने बांगरमऊ को तहसील बनाने की घोषणा कर दी। इसके बाद 31 जुलाई 14 को नोटिफिकेशन हुआ और 15 अगस्त 14 को नगर के जसा सिंह स्मारक भवन में अस्थाई रूप से तहसील का संचालन शुरू कर दिया गया। तहसील संचालन के लिए उक्त भवन पर्याप्त नहीं था तो अधिकारियों के हस्तक्षेप से तहसील का संचालन नगर के खाली पड़े पुराने अस्पताल भवन से किया जाने लगा। तबसे तहसील वही संचालित हो रही है और संडीला मार्ग पर नगर के बाहर तहसील भवन बनाने का काम तेजी के साथ किया जा रहा है।

भवन में तहसील का मुख्य भवन उप जिला अधिकारी तहसीलदार व नायब तहसीलदार आदि लोगों के न्यायालय कक्ष, विश्राम कक्ष व आवासीय भवन बन गए हैं सिर्फ मुख्य मार्ग से तहसील भवन कार्यालय तक मार्ग बनना शेष रह गया है। तहसील परिसर का निरीक्षण करने और आवास देखने से लगता है कि जिस तरह से बांगरमऊ को नई तहसील का दर्जा मिला है| उसी तरह से इस तहसील को जनपद की अन्य तहसीलों के भवन से अच्छा भवन भी मिला है । नये भवन में कब से तहसील चलना प्रारंभ हो जाएगी| इस बारे में उप जिलाधिकारी इंद्रसेन यादव ने बताया कि अब ज्यादा दिन नहीं लगेंगे| हफ्ते 2 हफ्ते के अंदर ही तहसील नए भवन से संचालित होना शुरू हो जाएगी। इसके लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति मांगी गई है।

रिपोर्ट- रघुनाथ प्रसाद शास्त्री

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