निजी कम्‍पनियां अंतरिक्ष संबंधी उपकरण बनाएंगी

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13-08-2015 इसरो उपग्रहों तथा लांच व्‍हेकिल के लिए आवश्‍यक अंतरिक्ष से संबंधित हार्डवेयर-रॉकेट, र्इंजन और स्‍टेजेज, प्रोपलेंट टैंक, स्‍पेसक्राफ्ट ढांचे, सौर पैनल, थर्मल नियंत्रण प्रणाली आदि को बनाने के लिए निजी कम्‍पनियों सहित भारतीय उद्योगों की भागीदारी को मजबूत करने और बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। यह परिकल्‍पना की गई है कि मानक उपकरणों को बनाने के साथ-साथ एकीकृत प्रणालियों/उप-प्रणालियों को उचित संकाय के माध्‍यम से बनाने में उद्योगों का बढ़ा हुआ योगदान होगा।

पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय तथा अंतरिक्ष विभाग तूफान निगरानी एवं तीव्रता, भारी वर्षा अलर्ट, कोहरा, समुद्री क्षेत्रों में जलभराव तथा सुनामी एवं तूफान की तेजी संबंधी चेतावनी केंद्र और डोपलर मौसम राडार की स्‍थापना के लिए आपस में सहयोग कर रहे हैं। राष्‍ट्रीय तथा वैश्विक स्‍तर पर उच्‍च आकाशीय रिजोल्‍यूशन के साथ अमेजिंग क्षमता में प्रगति तथा वर्तमान सुरक्षा विषयों पर विचार करते हुए सरकार ने आरएसडीपी-2001 की समीक्षा की है और विकासात्‍मक उद्देश्यों के लिए उच्‍च रिजोल्‍यूशन डाटा की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए नया/संशोधित आरएसडीपी 2011 प्रस्‍तुत किया है। आरएसडीपी-2011 यूजर को 1एम (आरएसडीपी 2001 में 1 के 5.8 एम की तुलना में) भेदभाव के बगैर अनुरोध के आधार पर रिजोल्‍यूशन के सभी सेटलाइट डाटा वितरित करने की अनुमति देता है। 1एम रिजोल्‍यूशन से बेहतर सभी डाटा वितरण से पहले जांच के बाद उचित एजेंसी द्वारा मंजूर किया जाएगा।

यह जानकारी आज राज्‍यसभा में पूर्वोत्‍तर विकास राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍यमंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष मंत्री डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने एक अतारांकित प्रश्‍न के उत्‍तर में दी।

source – PIB

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