निर्जला एकादशी व्रत करने से सुमेरु के समान सारे पाप नष्ट हो जाते है

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आपकी बात :  जय श्रीमन्नारायण : निर्जला एकादशी की बहुत-बहुत बधाई। मित्रों आज निर्जला एकादशी है धर्मराज युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण ने कहा आज की एकादशी के विषय में सत्यवती नंदन वेदव्यासजी ही इस विषय में बताएंगे। वेदव्यास जी ने कहा एक बार कुंती पुत्र भीम ने मुझसे कहा कि पितामह माता कुंती, राजा युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, और द्रोपदी एकादशी का व्रत रहते हैं।

मुझसे भी कहते हैं कि आप व्रत करने से सुमेरु के समानभी व्रत रहिए किंतु बिना खाए मैं जिंदा नहीं रह सकता। इसलिए कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे कि हमें सभी एकादशियों के व्रत का लाभ मिल सके, मैंने कहा कि भीम तुम जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करो ज्येष्ठ मास के दोनों एकादशियों के  पाप भी नष्ट हो जाते हैं। जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन प्रातः काल संकल्प ले कि मैं निराहार व्रत करूंगा दिनभर आचमन एवं कुल्ला करने के अलावा जल ना लें दूसरे दिन द्वादशी के दिन पारण करके ब्राह्मणों को दान दे।

एकादशी के दिन जल से भरा घड़ा एवं दुग्ध युक्त गाय गोदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।शंख चक्र गदा पद्म धारी भगवान नारायण का पूजन अर्चन करना चाहिए । ब्राह्मणों को अन्न वस्त्र गाय कमंडल एवं जूता दान करने से मनुष्य का कल्याण होता है।

निर्जला एकादशी का पावन पर्व समस्त पापों को हरने वाला है जो फल चतुर्दशी युक्त अमावस्या के श्राद्ध करने से प्राप्त होता है वही इस कथा के श्रवण करने से प्राप्त होता है और उस व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं ।इसलिए एकादशी का व्रत करना चाहिए यह सुनकर भीमसेन ने इस शुभ एकादशी का व्रत प्रारंभ कर दिया। तब से इस लोक में यह एकादशी पांडव एकादशी के नाम से नाम से विख्यात हुई ।

लेखक : ओम प्रकाश पांडे/अनिरुद्ध रामानुज दास

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