नमामि गंगे योजना के मानकों की उड़ाई जा रही धज्जियाँ

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डलमऊ/रायबरेली : भारत के प्रधानमंत्री से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की महत्वाकांक्षी नमामी गंगे योजना के साथ डलमऊ मे जिस घटिया सामग्री और मानक को दरकिनार कर कार्यो को कराया जा रहा है उससे तो यही लगता है कि ये विकास के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे की जेबो को भरने का माध्यम हो गया हो। चारो तरफ फैली हुई अव्यवस्था अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है यहाँ पर सभी निर्माण कार्य में मानक का हिसाब तो दूर उसका आधा भी नहीं कराया जा रहा है


नमामी गंगे योजना की कार्यप्रणाली हलफनामे के विपरीत कार्यो को अंजाम देने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं पर ये किसी गुणवत्ता के लिए नहीं बल्कि अपनी घटिया निर्माण को छुपाने के लिए दिन रात एक किया जा रहा है। यहां सौंदर्यीकरण मे लगाए जा रहे लाल पत्थर अपने कागज के गुणवत्ता के साथ बिल्कुल भी न्याय नहीं करते दिख रहे हैं। बहुत ही पतले व कमजोर पत्थरों व घटिया मसाले से पत्थरों से घाटों को सजाने का कार्य डलमऊ मे नमामी गंगे योजना पर प्रगति पर है। यहां के निवासी मानवेंद्र मिश्रा सभासद व शिवाकांत ने यहां चल रहे खेल के बारे में जानकारी दी कि कोई भी काम मानक के साथ नहीं हो रहा है और ये कहा गया था कि एक घाट पर पूरा काम समाप्त करने के बाद दूसरे घाट पर काम शुरू किया जायेगा, मगर ऐसा नहीं हो रहा है। नमामी गंगे योजना के इंचार्ज दिलीप मौर्य जी इस प्रकरण पर कुछ भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं।

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