नियोजन इकाई नहीं मानती शिक्षा विभाग का आदेश

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प्रतीकात्मक
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पटना : राज्य में शिक्षक नियोजन के लिए जिम्मेदार नियोजन इकाइयों में बड़ी तादाद ऐसी है जो राज्य सरकार के शिक्षा विभाग का आदेश नहीं मानती। उनकी काहिली से शिक्षकों के नियोजन का बुरा हाल है। आलम यह है वर्ष 2011 में टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण करने वाले शिक्षक अभ्यर्थियों में हजारों की संख्या ऐसी है जिनका शिक्षक बनने का सपना पूरा नहीं हुआ है।

ताजा मामला राज्य में पांचवें चरण के अंतर्गत माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षकों के नियोजन का है। 17 जनवरी से नियोजन की कार्रवाई शुरू कर 3 फरवरी को प्रमंडलवार नियुक्ति पत्र बांटने का निर्देश शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने दिया था। लेकिन नियोजन इकाइयों ने सरकार के आदेश की अनदेखी करते हुए मेधा सूची का तय समय पर प्रकाशन ही नहीं किया और जिससे नियोजन की प्रक्रिया स्वत: ही रुक गई। मेधा सूची का प्रकाशन जिन जिलों में नहीं हो सका उनमें बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, पूर्वी चंपारण, मुंगेर, पटना रोहतास, सुपौल, नालंदा शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने नियोजन इकाइयों की इस काहिली को गंभीरता से लिया है तथा कारण तलब किया है।

माध्यमिक निदेशक राजीव प्रसाद सिंह रंजन ने सभी नगर निगम के आयुक्त, सभी डीडीसी सह सीईओ, नगर परिषद व नगर पंचायत के सभी कार्यपालक पदाधिकारी और सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षकों का नियोजन नहीं करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। निदेशक ने दो टूक कहा है कि शिक्षा विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि नियोजन से संबंधित कार्यक्रम में कोई भी परिवर्तन बिना निदेशालय की पुर्वानुमति के नहीं की जा सकती। बावजूद इसके बड़ी संख्या में नियोजन इकाइयों ने शिक्षकों के नियोजन कार्यक्रम का पालन नहीं किया है।

गौरतलब है कि दस हजार उच्च माध्यमिक और 5 हजार माध्यमिक शिक्षकों के रिक्त पदों को एसटीईटी उत्तीर्ण शिक्षक अभ्यर्थियों से के लिए प्रदेश में पांचवें चरण का शिक्षक नियोजन चल रहा है। शुक्रवार को (3 फरवरी) को नियोजन पत्र बांटा जाना है। उसके बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय जिलावार समीक्षा करेगा। तब पता चलेगा कि कितने शिक्षक बहाल हुए तथा कितनी नियोजन इकाइयों ने नियोजन शिड्यूल की अनदेखी की।

रिपोर्ट – आशुतोष कुमार

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