नियोजित शिक्षकों का हो सकता है अंतर्जिला तबादला

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बिहार: नियोजित शिक्षकों को सेवा अवधि में एक बार मानवीय आधार पर अंतर्जिला तबादले का मौका मिल सकता है। शिक्षा विभाग नियोजित शिक्षकों की इस मांग पर सहमत दिख रहा है हालांकि शीर्ष स्तर पर इसको लेकर फैसला होना अभी बाकी है। राज्य के प्रारंभिक से लेकर प्लसटू सरकारी विद्यालयों तक में कार्यरत करीब 4 लाख नियोजित शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों की सेवाशर्त तय करने के लिए बनी सचिव स्तरीय कमेटी ऐच्छिक स्थानांतरण को लेकर क्या अनुशंसा करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अंतर्जिला और अपने नियोजन इकाई से बाहर तबादले की नियोजित शिक्षकों की मांग पुरानी है। नियोजित शिक्षकों ने वेतनमान और सेवाशर्त की लड़ाई साथ लड़ी थी।

राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2015 के प्रभाव से नियोजित शिक्षकों के लिए वेतनमान लागू कर दी, जबकि सेवाशर्त के लिए 11 अगस्त 2015 को छह सदस्यीय कमेटी बनाई। वित्त विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में शिक्षा, सामान्य प्रशासन, पंचायती राज, नगर विकास के प्रधान सचिव तथा अपर महाधिवक्ता सदस्य हैं। मुख्य सचिव ने इस कमेटी को गठित करते हुए तीन महीने में उससे रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी को नियोजित शिक्षकों की सेवा निरंतरता, ऐच्छिक स्थानांतरण, सेवाकालीन प्रशिक्षण, प्रोन्नति के अवसर, अनुशासनिक प्राधिकार समेत सेवाशर्त से जुड़े अन्य बिंदुओं पर अपनी अनुशंसा राज्य सरकार को देनी है।

बदलना होगा शिक्षकों का कैडर : गौरतलब है कि नियोजित शिक्षक ऐच्छिक तबादला नहीं मिलने को गुणवत्ता शिक्षा में बाधा मानते हुए अंतर्जिला तबादले की मांग लम्बे समय से कर रहे हैं। हालांकि इसमें सबसे बड़ी दिक्कत शिक्षकों की नियुक्ति नियोजन इकाई के तहत होना है। अंतर्जिला तबादले के लिए नियोजन नियमावली में संशोधन की दरकार होगी तथा शिक्षकों का कैडर भी बदलना होगा। एक शिक्षक नेता ने कहा कि शिक्षा मंत्री शिक्षकों की इस वाजिब मांग से सहमत हैं। बहरहाल नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों का इंतजार समाप्त होने वाला है, क्योंकि सेवाशर्त का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है। जल्द ही इसपर शिक्षक संघों की राय ली जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव से शिक्षकों से रायशुमारी के लिए समय देने की मांग की है। उनकी स्वीकृति मिलते ही शिक्षक संघों की बैठक बुलाई जाएगी।

रिपोर्ट- आशुतोष कुमार सिंह 

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