अमेठी के नौगिरवा विद्युत उपकेंद्र में नियुक्त कर्मचारी के स्थान पर दूसरा व्यक्ति करता है कार्य

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अमेठी(ब्यूरो)- सूबे की योगी सारकार ने कार्मचारियो के स्थान पर दूसरे आदमी के कार्य करने माँमाले को संजीदगी दिखाते हुए शिक्षा महकमे को आदेश जाारी क़िया कि शिक्षक अपना पद एवं नियुक्ति तिथि तथा फोटो बोर्ड पर चस्पा करे लेकिन अन्य विभाग को कोई आदेश नहीं जारी किया शायद शिक्षा विभाग को छोड़ कर शेष को कर्मठ एवं कार्य के प्रति वफादार माना था लेकिन यहाँ तो मामला कुछ अलग ही दिख रहा है। विद्युत विभाग में दूसरे के स्थान पर कार्य करने का मामला प्रकाश में आया है।

सूत्रो की माने तो विद्युत् उपखंड नौगीरवा में नियुक्त कर्मचारी के स्थान पर दूसरा व्यक्ति कार्य करता है । जहाँ इन दिनों बिजली विभाग की समस्याएँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खराब ट्रांसफार्मर को बदला जाना सिटीजेन चार्टर के मुताबिक नहीं हो रहा है। ग्रामीण उपभोक्ताओं को तय सप्लाई रोस्टर से कम विजली मिल रही है। बताते चले कि भेटुवा ब्लाक के नौगिरवा विद्युत उपकेंद्र में विभाग की ओर से खलील अहमद लाइन मैन के रूप मे नियुक्त हैं लेकिन उनकी ड्यूटी उनके पुत्र रिजवान अहमद करते हैं।

मीडिया ने जब इस संबंध मे रिजवान अहमद से जानकारी लिया तो उन्होने स्वीकार किया कि वो अपने पिता कि ड्यूटी करते हैं क्योंकि पिता खलील अहमद बीमार चल रहे हैं। रिजवान ने यह भी कहा कि इस बात कि जानकारी अधिशासी अभियंता खंड दो के पास है। जब इस मामले मे जूनियर इंजीनियर अमित से बात किया तो उन्होने बताया कि उन्हें यहाँ का प्रभार लिए अभी एक महीने से कम का समय हुआ है अभी उन्हे इस बात कि जानकारी ही नहीं है। हमने इस संबंध मे अधिशासी अभियंता खंड-2 को  फोन द्वारा संपर्क करना चाहा लेकिन उनका फोन नहीं उठा।

अब यहाँ कई गंभीर सवाल उठते हैं, पहला कि लाइनमैन एक कुशल श्रमिक है क्या बिना भर्ती प्रक्रिया से चयनित हुये उसका स्थान दूसरा कोई दूसरा ले सकता है? दूसरा, क्या जो वास्तव मे उस पद पर नियुक्त ही नहीं है क्या वो उस कार्य को करने का विधिक अधिकार रखता है? तीसरा, क्या उसको प्रशय देने वाले अधिकारी कानूनन सही हैं? चौथा, अगर कर्मचारी बीमार है और काम नहीं कर सकता है। तो उसके लिए विभागीय मेडिकल, अनुग्रह राशि अथवा स्वैछिक सेवानिवृत्ति जैसे विकल्पों की व्यवस्था होती है। क्या उसे बिना उसके सेवा प्रदान किए ही उसे पूरे काम करने वाले कर्मचारी की तरह वेतन मिलना चाहिए?

इन सिस्टम जनित समस्याओं के कारण ही विजली विभाग के उपभोक्ता विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग परेशान नजर आ रहे हैं। उन्हे उपभोक्ता अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड एक कंपनी है जो लाभ के लिए काम करती है। उपभोक्ता इसके ग्राहक हैं जिनको कई बार अधिकारी ग्राहक नहीं समझते हैं बल्कि अफसरशाही के चस्मे से इन्हे देखते हैं। कभी-कभी लगता है कि ऐसे निगमों का निजीकरण ही ठीक होता क्योंकि उपभोक्ता को कम से कम गुमराह तो ना ही किया जाता। इन्हीं उपभोक्ताओं से कंपनी चलती है। यही उनके कर्मचारियों के वेतन का भार उठाते हैं। कम से कम उन्हे उचित आदर और आत्मसम्मान के साथ सुविधा प्राप्त करने का हक तो मिलना ही चाहिए।

रिपोर्ट- हरि प्रसाद यादव

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