बीजेपी की हार का सबसे बड़ा कारण बने अमित शाह, इनकी वजह से ही मोदी के हाथ से निकल गया किंग मेकर

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प्रधानमंत्री मोदी और नितीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर
प्रधानमंत्री मोदी और नितीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर

दिल्ली- बिहार चुनाव के नतीजे सभी के सामने है और सभी को यह भी पता चल गया है कि NDA गठबंधन को बिहार में महागठबंधन के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा है I लेकिन यही मोदी है जिनका जादू अभी तक पूरे देश सहित पूरी दुनिया में हर किसी के सर पर चढ़कर बोल रहा था I फिर सवाल यह भी उठता है कि जिन मोदी की भाषा और शैली को उनके भाषण देने के अंदाज को करिश्माई कहा जा रहा था वही मोदी आखिर एक ही साल में पहले दिल्ली और उसके बाद बिहार में इतनी बुरी तरह से फ्लॉप कैसे हो गए I

अगर यह सवाल दिमाग में आते है तो इसके पीछे एक कारण यह भी है कि लोकसभा चुनाव में जिस ब्यक्ति ने मोदी को एक करिशामाई नेता बनाया था, मोदी के विकास कार्यों को पूरी दुनिया के सामने रखा था और मोदी को एक मुख्यमंत्री से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मुखिया और प्रधानमंत्री बना दिया था आज वह ब्यक्ति नरेन्द्र मोदी की बजाय बिहार के पूर्व और आने वाले मुख्यमंत्री के साथ खड़ा है I

आखिर क्यों छोड़ना पड़ा प्रशांत किशोर को मोदी का साथ –

जी हाँ हम आज बात कर रहे हैं कभी मोदी के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर के बारे में, पिछले साल लोकसभा चुनाव में मिली बम्फर जीत के बाद भी यह नाम सुर्ख़ियों में छाया हुआ था लेकिन लोकसभा चुनाव के कुछ दिन बाद ही इस नाम को लोगों ने भुला दिया और न सिर्फ लोगों ने बल्कि खुद बीजेपी ने भी इस नाम से किनारा काट लिया I कारण था इसका सबसे बड़ा बीजेपी के अध्यक्ष पद पर राजनाथ सिंह की बजाय अमित शाह का आना I मिडिया में छपी ख़बरों की माने तो प्रशांत किशोर और अमित शाह के बीच बात कुछ बनी नहीं और अमित शाह की तरफ से नजर अंदाज होने की वजह से ही प्रशांत को बीजेपी का साथ छोड़ना पड़ा I कहा तो यहाँ तक भी जाता है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद कुछ दिनों तक प्रशांत के पास कोई काम ही नहीं था और वह बेरोजगार हो गए थे I

वर्ष 2014 में चुनाव के बाद जब प्रशांत बेरोजगार हो गए थे तब उन्होंने कांग्रेस से भी संपर्क साधने का प्रयास किया था लेकिन बात नहीं बन सकी और प्रशांत किशोर को निराशा ही हाथ लगी लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही उनकी मुलाक़ात पूर्व राजनयिक और जेडीयू के सांसद पवन वर्मा से हुई और उन्ही के जरिये उनकी मुलाक़ात नितीश कुमार से हुई I

प्रशांत किशोर और नितीश कुमार के बीच कई चरणों की मीटिंग भी हुई जिसके बाद दोनों ही एक दूसरे के साथ काम करने को तैयार हो पाय I एक जाने माने अखबार की मानें तो इस बार प्रशांत ने नितीश को सहारा देने से पहले कुछ शर्ते रखी, जैसे मुख्यमंत्री के पद से जीतन राम मांझी को शीघ्र ही हटाया जाय और उस पद पुनः ही नितीश कुमार बैठ जाय, दूसरी शर्त उन्होंने रखी की प्रशांत का सीधे संपर्क नितीश कुमार से होगा, नितीश ने प्रशांत की सभी शर्ते मान ली और उसके तुरंत बाद ही जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटा दिया गया तथा खुद नितीश कुमार मुख्यमंत्री बन गए उसके बाद प्रशांत किशोर ने मोदी की ही तर्ज पर पूरे बिहार में और बिहार ही नहीं पूरे देश में नितीश की फिजा को मजबूत बनाने में जुट गए, उसके बाद जो नतीजे सामने आये वह आप देख ही रहे है I

अमित शाह के घमंड ने मोदी को हारने के लिए किया मजबूर –

एक प्रतिष्ठित अखबार की वेबसाईट पर छपी खबर की माने तो जून 2014 के महीने में प्रशांत किशोर और अमित शाह की मुलाकात हुई थी जिसमें प्रशांत ने अपने और अपनी टीम के बारे में अमित शाह से पूछा था कि जून के बाद क्या होगा ?

प्रशांत के इस सवाल पर अमित शाह ने बड़ा ही विचित्र सा जवाब दिया था उन्होंने कहा था कि जून के बाद क्या होगा जुलाई आएगी I और इतना ही नहीं सरकार के किसी भी पालिसी मेकिंग प्रोजेक्ट में किशोर की किसी भी प्रकार की भूमिका का आश्वासन भी नहीं दिया था इसके अलावा किशोर के काम की कीमत अदा करने की बात जरूर कही थी I वेबसाईट पर छपी खबर के मुताबिक उनसे यह कहा गया था कि आप और आपकी टीम ने जो कार्य किया है उसके लिए आपको भुगतान कर दिया जाएगा I शायद ही कारण था कि मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्शी तक पहुंचाने वाले व्यक्ति ने प्रधानमंत्री का साथ छोड़ एक डूबती हुई पार्टी का साथ दिया और एक बार फिर बन गया किंग मेकर I

 

धन्यवाद !

धर्मेन्द्र सिंह

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