कांग्रेस-सपा समझौता नही चढ़ा परवान

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रायबरेली। राजनैतिक मजबूरी के चलते भले ही आलास्तर पर समाजवादी पार्टी एवं कांग्रेस में चुनावी समझौता हो गया हो लेकिन जिले में तो समझौते की भावना कही भी नही दिखायी देती। क्योंकि जिन विधानसभा क्षेत्रों मे कांग्रेस प्रत्याशी उतरने थे वहां तो वह उतरे ही जहां सपाई विधायकों को टिकट मिला था, वहां भी कांग्रेसी प्रत्याशियों ने ताल ठोंकी है।

कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों ने विधानसभा चुनाव में भाजपा का रास्ता रोकने को लेकर राजनैतिक गुणाभाग के चलते आलास्तर पर समझौता किया। इस समझौते के क्रम में दोनों पार्टियों मे विधानसभा सीटो को लेकर बंटवारा भी आलास्तर पर कर दिया गया। प्रदेश में चाहे जहां इस समझौते का पालन हुआ हो फिलहाल इस जनपद में वह परवान नही चढ़ सका है। चुनावी समझौते के क्रम में सरेनी एवं ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र सपा के खाते में थे, इसलिए सरेनी से सपा प्रत्याशी देवेन्द्र प्रतान सिंह ने अपना नामांकन किया, लेकिन आलाकमान की अनुमति का हवाला देते हुए पूर्व विधायक अशोक सिंह ने भी कांग्रेस से अपना नामांकन कर दिया है। इसीप्रकार ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र से समझौते के अनुसार प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पाण्डेय ने नामांकन तो किया ही, पूर्व विधायक अजयपाल सिंह ने भी ताल ठोंक दी है। हरचन्दपुर विधानसभा क्षेत्र का भी हाल कुछ इससे अलग नही है जहां सपा विधायक रामलाल अकेला को जब टिकट नही मिला तो उन्होंने रालोद से नामांकन कर चुनाव मैदान में ताकत अजमाने की घोषणा कर दी।
रिपोर्ट – राजेश यादव

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