मेहनत तो पूरी हुई फिर चूक कहां हुई

0
133


सुलतानपुर : लोकतंत्र के उत्सव में लोक सक्रिय हो उनकी भागीदारी बढ़े इसके लिये अभियान दर अभियान चलाया तो गया, मेहनत भी पूरी हुई फिर चूक कहां हुई खूबसारे प्रयासों के बाद भी कारगर नतीजा नहीं निकला निर्वाचन आयोग द्वारा विभिन्न तरीके से खूब प्रचार प्रसार किया गया, शासन प्रशासन के साथ ही समाजिक संगठनो सरकारी अर्धसरकारी संस्थानो ने भी इस अभियान में हिस्सा लिया, बड़े-बड़े दावे किये गये लेकिन परिणाम सार्थक नही निकला | सरकारी मशीनरी का यह प्रयास औपचारिकता की रश्म अदायगी भर रहा । सुलतानपुर जनपद में महिला पुरुष मिलाकर लगभग 17लाख से अधिक मतदाता हैं। प्रशासन का दावा है कि इन 17लाख मतदाताओं को शतप्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित करने के लिये लगभग 243 महकमे के सहयोग से 107 स्थानों पर विभिन्न तरीके से मतदाता जागरुकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें ढाई लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और स्वयं मतदान में बढ़चढ़ कर भागीदारी के साथ ही जिले के 17लाख मतदाताओं को भी मतदान के लिये प्रेरित करने का संकल्प लिया था लेकिन, चुनाव बाद मतदान प्रतिशत का परिणाम उजागर हुआ तो सब के दावे की पोल खुल गयी |

गतवर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां मतदान प्रतिशत 58.60 रिकार्ड हुआ था वहीं 2017 के इस चुनाव में 57.49 मतदान प्रतिशत रिकार्ड किया गया यानि पिछला रिकार्ड भी बरकरार न रहा जबकि जिला प्रशासन का दावा यह भी था कि जिले में मतदान प्रतिशत कम होने वाले चिन्हित साढ़े छा सौ बूथो पर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिये चैपाल भी लगाई गयी यही नहीं जिले की पांचो विधानसभा चुनाव में तीन सौ के करीब माडल बूथ भी बनाये गये थे जहां टेन्ट लगे कुर्सियां धरी गयी बूथों को खूब सजाया गया था। मतदान के बाद जलपान की व्यस्था भी थी लेकिन इसके बावजूद भी दुलहन की तरह सजे ये बूथ मतदाता को अकर्षित न कर सके। अब आप प्रशासन के दावों से इतर सच्चाई भी जानिये मेहनत तो पूरी हुई लेकिन चूक कहां हुई चुनाव आयोग द्वारा चलाये गये मतदाता जागरुकता वाले इस कार्यक्रम में आम जनता की भागीदारी कहां कब कितनी रही? और मतदान के प्रति किसे जागरुक किया गया सवाल यह भी है मतदाता में जगरुकता पैदा करने के लिये मानव मानचित्र, कैण्डिल मार्च पतंग उत्सव स्कूलों में मतदाता मेला सहित विभिन्न आयोजन हुए वहीं मतदाता एक्सप्रेस बस भी यहां आयी लेकिन इनसब कार्यक्रमों में एक ही चेहरे हर जगह शामिल रहे। जागरुकता पढ़े-लिखो के बीच ही पैदा की गयी शहरों तक ही सीमित रही आयोजन बंद हालो में हुए मतदान की महत्ता उन्हें ही बतायी गयी जो पहले से ही वाकिफ रहे | अब जनता ही सवाल उठा रही है काश जगरुकता से जुड़े ये सारे कार्यक्रम ग्रामीण अंचलो में हुए होते तो आज मतदान प्रतिशत की तस्वीर दूसरी होती |

मतदाताओं को जागरुक करने मुंबई से हास्य कलाकार इमरान कुरैशी सुलतानपुर आये उनका कार्यक्रम सुलतानपुर में पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में हुआ जहां आमंत्रित प्रबुद्ध वर्ग का जमावड़ा रहा कुरैशी ने इन सबको मतदान की महत्ता बताई वोट देने के फायदे गिनाये फिर सब ने सेल्फी ली फोटो खिचावाई दूसरे दिन ग्रामीणों को अखबार से पता चला कि इमरान कुरैशी आये थें इसी के सप्ताह भर बाद चुनाव आयोग की ब्रांड अम्बेसडर पर्वतारोही पदमश्री अरुणिमा सिन्हा जिले में आयी रविवार का दिन था उनका कार्यक्रम के.एन.आई. व गनतपत सहाय महाविद्यालय में कराया गया । रविवार का दिन होने के कारण पूरे कालेज परिसर में छुट्टी जैसा माहौल रहा छात्र व स्टाफ नदारत रहे कुछ चयनित लोगों के बीच कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ। जागरुक मतदाता ही स्वस्थ लोकतंत्र का संभाहवक है प्रत्येक मतदाता की जागरुकता एक अच्छे जनप्रतिनिधि एंव एक अच्छी सरकार चुनने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह बात मतदान से विरत रहने वाले लोगो को भी समझनी होगी।

रिपोर्ट–संतोष कुमार यादव

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here