मदद को कोई नहीं आया राजनीति का नुमाइंदा

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औरैया(ब्यूरो)- इन्सान के अन्दर इंसानियत कितनी शून्य हो चुकी है, संवेदनशीलता खत्म हो चुकी है| ये सब देखने को मिला उस अंधी गरीब महिला पिंकी देवी की बेटी की शादी में जो प्रहरी टीम के सदस्य मनीष गुप्ता और एस खान की विशेष पहल पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से धूमधाम से हुई, जिसमें राजनीति का कोई रहनुमा बार-बार अपील और बुलावे पर भी नही आया जो उनकी शून्य हो चुकी संवेदनशीलता को दर्शाता है|

सैनिक कालोनी निवासी गरीब महिला पिंकी देवी जिसके पास अपना रहने को घर नही, बिजली नही , पानी नही, शौचलय नही, शादी को पैसे नही थे , की बेटी की शादी धूमधाम से हुई किसी चीज की कमी का एहसास नही हुआ| उसे उसकी ख्वाहिस से ज्यादा मदद मिली वह शहर के हर उस शख्स के पास गयी जो अपने आपको समाज का समाज सेवी होने का ठेकेदार समझते थे और जिनके पास समाज सेवा का तमगा था, अपनी सोहरत को बटोरने के लिये एक रुपया खर्च करते है तो मीडिया में सौ का ढिढोरा पीटते है|

समाज सेवा के हितैसी बनने वाले आखिर किस समाज की सेवा करते है, उस महिला ने सभासद से लेकर विधायक तक सबके दर पर बेटी की शादी के मदद की गुहार भेजी थी परन्तु कही से कोई मदद नही मिली थक हार उसने अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया| वहॉ भी उसे मायूसी मिली और एक दिन अपनी दुधमुही बच्ची वैष्णवी के साथ उपजिलाधिकारी दफ्फर के बाहर गुमसुम बैठी थी वही हमारे संवाददाता और इस पूरी मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने वाले एस खान ने उसकी व्यथा और दुख भरी दास्तान को लगातार मार्मिक अपील के साथ कई बार जागरूकता लाने का प्रयास किया जिसपर उपजिलाधिकारी सदर अमित राठौर, कई सामाजिक संगठनों सहित भारत स्काउट गाइड और कई लोंगो ने दिल खोलकर मदद की परन्तु समाज सेवा का दम भरने वाले एक भी नेता मदद को आगे नही आये, फिर काहे की समाज सेवा जब वोंटो का वक्त आता है तो यही रहनुमा गरीबों का हाथ थाम कर ऐसे चलते है मानों इनसे बड़ा समाज सेवा का कोई हितैसी है ही नही धिक्कार है| ऐसी समाज सेवा और लोकतंत्र को जो कहते है सबका साथ सबका विकास|

रिपोर्ट- मनोजकुमार

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