भलाई को कभी कोई रोक नहीं सकता

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आचार्य चाणक्य के अनुसार –

सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज होता हैं लेकिन अच्छाई सभी दिशाओं में बिना किसी सहारे के अपने आप ही फैलती हैं I

chanakya 9

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