नगर पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की जाॅच अब तक नहीं

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थानखम्हरिया/छत्तीसगढ़(रा. ब्यूरो)- स्थानीय नगर पंचायत में अमरबेल की तरह फैल चुके भ्रष्टाचार एवं अनियमितता तथा तानाशाही रवैये की शिकायत पार्षदों ने विभागीय मंत्री, नगरीय निकाय विभाग के मुख्य सचिव, उपसंचालक तथा जिलाधीश से की थी परंतु दो महिने बाद भी जाॅच प्रक्रिया परवान नहीं चढ़ सकी है जिससे पार्षदों में असंतोष व्याप्त है।

पार्षदों ने लिखित शिकायत में बताया कि नगर में अनेक पुराने शौचालयों को फर्जी ढ़ंग से लीपापोती कर नया निर्माण बताकर राशि आहरण कर ली गयी। नाम सहित 32 फर्जी शौचालयों की सूची उपसंचालक को सौंपी गयी है परंतु अब तक कार्रवाई शिफर है। जब पार्षदों ने उप अभियंता से फर्जी आहरण की शिकायत की गयी तो कहा गया कि रिकव्हरी करायी जायेगी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी है।

राज्य प्रवर्तित योजना के तहत् नगर में साॅस्कृतिक भवन हेतु 40 लाख रू स्वीकृत हुये हैं। इस भवन को नगर से दो किमी दूर बनाने की योजना पर काम चल रहा है जिसकी उपयोगिता पर संदेह है। सूत्रों ने बताया कि जिस स्थल को पी आई सी की बैठक में स्वीकृत किया गया और इसी का नक्शा भेजकर इसे शासन से स्वीकृत कराया गया बाद में स्थल परिवर्तित किया जाना समझ से परे है। सामान्य सभा में स्थल परिवर्तन की जानकारी दी गयी तो विपक्ष के पार्षदों के साथ सत्तापक्ष के भी कुछ पार्षदों ने आपत्ति जतायी। पार्षदों के साथ ही नागरिकों ने भी मांग की है कि इसका निर्माण नगर के मध्य में हो।

पार्षदों ने आरोप लगाया कि स्टीमेट रिवाईज कर चार साल पुराने सी सी रोड में फिर निविदा आमंत्रित कर चहेते ठेकेदारों को उपकृत तथा शासकीय राशि का दुरूपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। 32 लाख रू की लागत से बने गौरव पथ पर कई बार सुधार कार्य करने के बाद सी सी रोड का टेण्डर किया गया है। पार्षदों ने शिकायत की है कि बिना टेण्डर के खेल मैदान में नाली और गेट निर्माण किया जा रहा है।

पार्षदों ने बताया कि भू अनुज्ञा देने, नामांतरण के नाम पर भी भ्रष्टाचार कर नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नगर विकास से कोई सरोकार नहीं है। सप्ताह में बमुश्किल दो तीन दिन मुख्यालय में रहते हैं विभागीय बैठक, कलेक्टर जनदर्शन तो कभी और किसी बहाने मुख्यालय से गायब रहते हैं।

नगर की मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। नगर की अधिकांश नालियाॅ जाम हो चुकी हैं बारिश आने वाली है पानी का उचित निकास न होने से नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। नगर का कोई कोना अतिक्रमण से अछूता नहीं है जिसकी जहाॅ मर्जी बेखौफ अतिक्रमण कर रहा है प्रशासन मौन है।

शासकीय भूमि को संरक्षित रखने की कार्रवाई के तहत् पिछले दिनों कोटवारी जमीन को खाली कराया गया परंतु उससे लगे लगभग एक एकड़ अतिक्रमण को नहीं हटाया गया। पुराने मछली मार्केट में हुये अतिक्रमण को न्यायालय के आदेश के बावजूद कब्जामुक्त नहीं किया गया है।

मटन मार्केट होने के बावजूद मुख्य मार्ग, चौक, चौराहों में मांस मटन की बेधड़क बिक्री की जा रही है। सब्जी बाजार को नये हाट बाजार में स्थानांतरित करने अनेक बार उच्च अधिकारी निर्देशित कर चुके हैं परंतु काम करने का जज्बा ही नहीं है। पुराने सब्जी मण्डी  का शेड तोड़ने प्रस्ताव भेजने स्वयं जिलाधीश कह चुकीं परंतु एक साल बाद भी इस काम में कोई प्रगति नहीं है।

राज्य शासन द्वारा चलाये जा रहे लोक सुराज के समाधान शिविर में आये एक भी आवेदन पर गंभीरता नहीं दिखायी गयी नगर में यह अभियान केवल औपचारिक बनकर रह गया। करोड़ों रू की लागत से नल जल योजना के तहत् नयी पाईप लाईन बिछायी गयी तथा विशाल टंकी का निर्माण किया गया परंतु नागरिकों के कंठ तृप्त नहीं हुये।

कार्य पूर्ण होने के दो साल बाद भी यह नगर पंचायत को हैण्ड ओव्हर नहीं हो सका है इसके बावजूद अवैध ढ़ंग से नल कनेक्शन दिये जा रहे हैं।

पार्षदों की शिकायत पर मुख्य सचिव कार्यालय के पत्र क्र cs – 3914 DAK / 2017 दिनांक 12।04।17 का संज्ञान देते हुये कार्यालय कलेक्टर ( शिकायत शाखा ) बेमेतरा ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तथा परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण बेमेतरा को सात दिन में जाॅच कर प्रतिवेदन पेश करने का आदेश दिया था परंतु जाॅच की कार्रवाई कहाॅ तक पहुची अब तक कोई खबर नहीं है। पार्षदों ने मांग की है कि उपर्युक्त बिंदुओं पर सूक्ष्मता से जाॅचकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाये।

नगर पंचायत में चैन बनाकर चहेते ठेकेदारों को ठेका देने का गोरखधंधा भी फलफूल रहा है। मन माफिक ठेकेदार को ही खुली निविदा का निविदा पत्र दिया जाता है इसी के चलते कुछ दिनों पूर्व शिकायत के बाद अनेक टेण्डर निरस्त कर दिये गये।

इसी प्रकार एक अन्य मामले में जब कुछ पार्षद खुले टेण्डर की प्रक्रिया देखने गये तो कुछ ठेकेदारों ने इसका विरोध किया और विवाद की स्थिति निर्मित होने पर प्रक्रिया रोक दी गयी पार्षदों ने आशंका जाहिर की है कि गोलमाल का खेल चल रहा है। पार्षदों ने यह आरोप भी लगाया कि सामान्य सभा की बैठक हर तीन माह के अंतराल में होनी चाहिये परंतु छ: महिने में बैठक होती है योजनाओं के बारे में पार्षदों को पूरी जानकारी नहीं दी जाती।

10 लाख या इससे ऊपर का काम है तो सामान्य सभा की बैठक में इस पर स्वीकृति होनी चाहिये परंतु ऐसा नहीं होता। शासन एवं जनप्रतिनिधियों को बैठकों में अनेक जानकारियाॅ गलत दी जाती हैं। पार्षदों ने सी एम ओ एवं अध्यक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों के मामले में वार्डों से भेदभाव भी किया जाता है।

वार्ड 8 के पार्षद ने बताया कि पार्षद निथि के अलावा उनके वार्ड में एक रू का काम नहीं हुआ है। पिछले दिनों जारी हुये 80 लाख रू के टेण्डर में एक वार्ड में ही 36 लाख रू के कार्य थे इस भेदभाव से पार्षद काफी आहत हैं। पिछले दिनों स्वच्छता पखवाड़ा चलाया गया परंतु नगर में कहीं भी इसका असर नहीं दिखा।

शिकायत करने वाले पार्षदों के नाम नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमा ठाकुर, रोहित भारती, संजय अग्रवाल, संतोष शर्मा, कन्हैया निर्मलकर, नीलकण्ठ निर्मलकर, रमेश कुमार, ईश्वर पटेल, सुशीला निषाद मनोनीत पार्षद वीरेन्द्र जोशी तथा राजकुमार निषाद।

के एस मण्डावी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व साजा – इस संबंध में मुझे अब तक कोई आदेश नहीं मिला है जानकारी लेता हूॅ।

रिपोर्ट-दिलीप देवांगन/हरदीप छाबड़ा

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