केजरीवाल सरकार के विधायकों की सेलरी में 400% की बढ़ोत्तरी वाले बिल को केंद्र सरकार ने भेजा वापस

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Arvind-Kejriwal-

नई दिल्ली- दिल्ली की केजरीवाल सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच विवाद एक बार फिर से बढ़ सकता है | दरअसल इसके पीछे का प्रमुख कारण आपको यह बता देते है कि केद्रीय गृहमंत्रालय ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के माध्यम से दिल्ली सरकार के विधायकों की सैलरी बढाने वाले बिल को वापस यह कहते हुए भेज दिया है कि दिल्ली सरकार ने उसे सही फॉर्मेट में नहीं भेजा है |

केद्र सरकार की तरफ से जारी नोट में कहा गया है कि, दिल्ली सरकार ने इसे सही फॉर्मेट में नहीं भेजा है, जब तक इस बिल को सही फॉर्मेट में नहीं भेजा जाएगा तब तक हम इसे आगे नहीं भेज सकते है | गौरतलब है कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की सत्ता में पहुँचने के बाद एक बिल को मंजूरी दी थी जिसके तहत दिल्ली के विधायकों की सैलरी में 400 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए |

केंद्र सरकार के सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के अनुसार बताया जा रहा है कि गृहमंत्रालय ने दिल्ली सरकार से कहा है कि वह एक ऐसा कारण बताये जिससे यह माना जा सके कि दिल्ली में विधायकों के जीवन यापन का खर्च अब 400 प्रतिशत तक बढ़ चुका है अगर ऐसा है तो अवस्य ही इस बिल पर विचार किया जाएगा | साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से नोट जारी करते हुए यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार इस बिल को सही फॉर्मेट में भेजे उसके बाद इसे अवश्य ही आगे बढाया जाएगा |

उल्लेखनीय है कि 2015 में दिल्ली विधानसभा ने विधायकों की सैलरी में संशोधन संबंधी यह बिल पास किया था| इसमें विधायकों की सैलरी 88 हजार से बढ़ाकर 2 लाख 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा था| इसके साथ विधायकों का यात्रा भत्ता भी 50,000 रुपये से बढ़ाकर तीन लाख सालाना करने का प्रावधान किया| इस बिल के अनुसार, दिल्ली के विधायकों को बेसिक सैलरी- 50,000, परिवहन भत्ता- 30,000, कम्यूनिकेशन भत्ता- 10,000 और सचिवालय भत्ते के रूप में 70,000 रुपये प्रति महीने का प्रावधान था|

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