योगी के सीएम बनते ही हरकत में आया उत्तर प्रदेश प्रशासन, अवैध रूप से चल रहे दो बूचड़खाने हुए सील

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इलाहाबाद (ब्यूरो) : योगी आदित्यनाथ ने सीएम बनते ही भाजपा द्वारा किए हुए सभी वादों को पूरा करने का काम बहुत तेजी के साथ शुरू कर दिया है। दरअसल आपको बता दें कि रविवार को योगी के शपथ लेने के बाद ही हरकत में आये इलाहाबाद प्रशासन ने करेली पुलिस की मौजूदगी में अटाला और नैनै चौबंदी मोहल्ले में मानक के विपरीत चल रहे स्लाटर हाउस को बंद करा दिया है।

आपको यह भी बता दे कि शहर के अटाला के साथ लगे रामबाग और नैनी में चल रहे इन बूचड़खानों को बंद कराने का आदेश एनजीटी ने पहले ही दे दिया था, लेकिन एनजीटी के आदेश का इन बूचड़खानों के मालिकों पर कोई भी असर नहीं पड़ा हुआ था और जैसे-तैसे यह सभी बूचड़खाने चलाए जा रहे थे। आए दिन में जानवरों को बड़ी संख्या में काटा जा रहा था।

प्रदेश में अवैध रूप से चल रहे हैं 250 से अधिक बूचड़खाने-
जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है अकेले उत्तर प्रदेश में 250 से अधिक बूचड़खाने ऐसे हैं जो मानक के विपरीत और अवैध रूप से आए दिन जानवरों की कटाई का काम चल रहा था। इन बूचड़खानों को चिन्हित भी किया जा चुका है। लेकिन अब तक इन बूचड़खानों के मालिकों के रसूक की वजह से इन्हें बंद नहीं करवाया जा सका था।

हालांकि बताया यह भी जा रहा है कि ज्यादातर बूचड़खानों को नगर निगम प्रशासन के अधिकारी कागज पर बंद ही बता रहे हैं लेकिन यदि तहकीकात की जाती है तो अक्सर यह सामने निकल करके आता है कि बूचड़खाने जैसे के तैसे ही चल रहे हैं।

अब योगी प्रशासन ने जिस तरह से इलाहाबाद के दो बूचड़खानों को सील किया है उससे लोगों के भीतर यह आस जगी है कि सूबे में कोई भी अवैध बूचड़खाना नहीं चलेगा साथ ही मोदी सरकार ने चुनाव के दौरान आम जनता से जिन वादों को किया था उन्हें पूरा करने के लिए योगी प्रशासन प्रतिबद्ध है।

कागज पर बंद बता रहा था नगर निगम प्रशासन इन हैं-
आपको बता दें कि रविवार रात नगर निगम के पशुधन अधिकारी डॉक्टर धीरज गोयल अपने मातहतों की टीम के साथ पहले करेली थाने पहुंचे और वहां से उन्होंने पुलिस बल को अपने साथ लेकर अटाला स्थित बूचड़खाने पहुंचे जहां पर उन्होंने पहले बूचड़खाने के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और बाद में उसे सील कर दिया। इसके बाद वह नै नी के एक-दूसरे बूचड़खाने पहुंचे तथा उसे भी वहां सील कर दिया गया। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि इन सभी बूचड़खानों को नगर निगम के अधिकारी कागजों पर बंद बता रहे थे जबकि यहां प्रतिदिन 90 100 के आसपास जानवर काटे जा रहे थे।

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