इस मंदिर में रात के 2 बजे से सुबह के 5 बजे तक कोई भी नहीं रुकता, पुजारी भी नहीं, जो रुका उसकी हो गयी मौत, दुनिया भर के वैज्ञानिक भी मान चुकें है हार

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आपने अभी तक हजारों, लाखों मंदिरों या फिर कहें तो करोंड़ों मंदिरों के बारे में सुना होगा लेकिन आपने जब कभी भी किसी मंदिर के बारे में सुना होगा तो यही कि जब भी कोई भक्त इस मंदिर में अपने आराध्य से कुछ भी मांगता है तो उसकी मुराद जरूर उसके आराध्य पूरा करते हैं I लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहाँ यदि कोई गलती से भी रात में 2 बजे से सुबह के 5 बजे के बीच रुक जाए तो उसकी मौत हो जाती है I

अगर आपने नहीं सुना है तो आज हम आपको बता देतें है कि हमारे ही देश में एक ऐसा मंदिर हैं जहाँ पर कोई भी व्यक्ति यहाँ तक की मंदिर के पुजारी भी रात्रि के 2 बजे से सुबह के 5 बजे के बीच नहीं रुकते है I लोगों का ऐसा कहना है कि जब किसी ने यहाँ पर इस दौरान रुकने की कोशिस की है उसकी अगले दिन लाश ही मिली है वह व्यक्ति जीवित नहीं मिला है I जी हाँ यह मंदिर हैं मध्यप्रदेश में शारदा मैया का पवित्र मैहर मंदिर I

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आखिर कोई क्यों नहीं रुकता इस मैहर माता के मंदिर में रात 2 से सुबह 5 बजे के बीच –

मैहर मंदिर या फिर माँ शारदा का मंदिर देश भर में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक है Iऐसी मान्यता है कि यहाँ पर माता सती का कंठ और हार गिरा था I हार गिरने की वजह से इस स्थान को मैहर के नाम से संबोधित किया जाता है I यहाँ पर माता को मंदिर है इसकी स्थापना नहीं की गयी है बल्कि माता के इस मंदिर का स्वयं से ही यहाँ पर प्रादुर्भाव हुआ है I देवी माता को स्वयंभू कहा जाता है I मैहर माता के इस मंदिर में प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में श्रद्धालु पूरे भारत से और भारत के बाहर से भी दर्शन करने के लिए आते है I यह मंदिर मध्यप्रदेश के त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है I इस मंदिर तक तक पहुँचने के लिए भक्तों को तकरीबन 1063 सीढियां या फिर इनसे भी ज्यादा चढ़ कर जाना पड़ता है I और यहाँ शारदा माँ की मूर्ति के साथ ही इस मंदिर में भगवान् नरसिंह और पवनपुत्र हनुमान की भी मूर्ति स्थापित की गयी है I

 

चूँकि माता का मंदिर विशाल पर्वत की चोटी पर स्थित है तो यहाँ पहुँचने में लोगों को तक़रीबन1063 सीढियां चढ़ कर जाना पड़ता है जिसकी वजह से बहुत बूढ़े या फिर कमजोर माता के भक्त मंदिर परिसर तक नहीं पहुँच पाते थे, इसीलिए मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2009 में मंदिर से नीचे तक आने जाने के लिए एक रोप-वे की व्यवस्था करवा दी है I अब मंदिर परिसर तक सभी श्रधालुओं को बहुत ही आसानी के साथ पहुंचाया जा सकता है I

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क्या हैं मंदिर में रात न रुकने के पीछे का राज –

कहा जाता है कि आल्हा और उदल जो कि भारतीय इतिहास के दो महान योद्धा है I उन दोनों ही भाइयों ने शारदा माँ के इसी मंदिर में 12 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर माता ने आल्हा को अमरता का वरदान दिया था I लोगों की आज भी ऐसी मान्यता है कि आल्हा माँ शारदे के मंदिर में प्रतिदिन रात में 2 बजे से सुबह के 5 बजे के बीच दर्शन करने के लिए आते है I सबसे पहले आज भी माता के दर्शन करने का अधिकार केवल इन्हें ही प्राप्त है I और इतना ही नहीं कि सिर्फ पूजा करने का ही अधिकार प्राप्त है बल्कि माता का पूरा साजों श्रृंगार भी यही करते है I

जब भी प्रातः 5 बजे मंदिर के कपाट खोले जाते है तो प्रत्यक्षदर्शियों, श्रधालुओं और मंदिर के पुजारियों का ऐसा कहना है कि माता के चरणों में पुष्प चढ़े हुए रहते है और इतना ही नहीं माता कि बिधिवत पूजा भी हो चुकी होती है I

लोगों का ऐसा मनना है कि आज तक जिस किसी ने भी यहाँ रात में रुकने की जहमत उठायी है जिद की है वह सब के मारे गए है I कोई भी जीवित नहीं बच सका है इसीलिए अब यहाँ पर कोई भी रात के 2 बजे के बाद जब मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है तब से लेकर सुबह के 5 बजे तक यहाँ पर कोई भी नहीं रुकता है I

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