वर्ष 2018 को लेकर नास्त्रेदमस ने की है कुछ बहुत ही डरावनी भविष्यवाणी, सच होने के बन रहे है आसार

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नास्त्रेदमस –
फ़्रांस के और दुनिया के सबसे चर्चित भविष्यवक्ताओं में से एक नास्त्रेदमस ने वर्ष 2018 के लिए कुछ बेहद ही डरावनी भविष्यवाणियाँ की है | इन भविष्यवाणियों के बारे में ऐसा लग भी रहा है कि नास्त्रेदमस की बाकी बातों की ही तरह से यह भी सत्य साबित हो सकती है | ऐसे आसार स्पस्ट बनते हुए नज़र आ रहे है | अगर नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी की बात करें तो साल 2018 दुनिया के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है |

कौन था नास्त्रेदमस –

वैसे तो नास्त्रेदमस के बारे में आज आधी से ज्यादा दुनिया जानती है लेकिन फिर भी जो लोग नास्त्रेदमस के बारे में नहीं जानते है उनको हम बता दें कि नास्त्रेदमस का जन्म फ़्रांस के एक बेहद छोटे से गाँव सेंट रेमी में हुआ था | नास्त्रेदमस केवल भविष्यवक्ता ही नही, डॉक्टर और शिक्षक भी थे | ये प्लेग जैसी बिमारियों का इलाज करते थे | इन्होने ने अपनी कविताओ के द्वारा भविष्य मे होने वाली घटनाओ का वर्णन किया था |

गलत व्याख्याओं का परिणाम है भविष्यवाणियाँ-

अधिकांश शैक्षणिक और वैज्ञानिक सूत्रों का कहना है कि दुनिया की घटनाओं और नास्त्रेदमस के शब्दों के बीच दिखाए गए संबंध काफी हद तक गलत व्याख्याओं या गलत अनुवाद का परिणाम है या फिर इतने कमजोर हैं कि उन्हें वास्तविक भविष्य बताने की शक्ति के साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना बेकार है | कुछ गलत व्याख्याएँ या गलत अनुवाद तो जानबूझकर भी किए गए हैं | इस के बावजूद है भी, बीसवीं शताब्दी में नास्त्रेदमस की कथित भविष्यवाणियाँ आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गईं और कई प्रमुख विश्व घटनाओं की भविष्यवाणी का श्रेय उन्हें दिया गया |

क्या है 2018 को लेकर भविष्यवाणी-

वर्ष 2018 की बात करें तो नास्त्रेदमस ने कहा था कि इन्शान ही इन्शान का दुश्मन बन जाएगा और आसमान से आग के गोले गिरेंगे और लोग असहाय हो जायेंगे | उन्होंने कहा था कि यह तीसरा विश्वयुद्ध दो देशों के विरुद्ध नहीं अपितु दो दिशाओं में होगा जो कि पूरब और पश्चिम होंगी | बताते चलते है कि हालात भी ऐसे ही कुछ बन रहे है क्योंकि अमेरिका और उत्तरकोरिया के बीच तनातनी पूरे चरम पर है | इसके साथ ही साथ एशिया में जिस तरह से चाइना अपनी विस्तारवादी नीतियों से अपने प्रभुत्त्व को स्थापित करने में जुटा हुआ कही न कही वह भी एक बड़ी मुसीबत को दावत दे रहा है | इसके अलावा यदि और कारणों की बात करें तो तमाम आतंकी संगठन भी इस भविष्यवाणी को सच साबित करने में पूरी तरह से प्रयासरत है |

कविताओं के माध्यम से ही क्यों करता था भविष्यवाणी-

गौरतलब है कि नास्त्रेदमस अपनी भविष्यवाणियों को कविताओं, छंदों के माध्यम से दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करता था | ऐसा वह क्यों करता था उसके पीछे एक बड़ा ही दिलचस्प किस्सा है कि, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां की ख्याति सुन फ्रांस की महारानी कैथरीन ने अपने बच्चों का भविष्य जानने की इच्छा जाहिर की | नास्त्रेदमस अपनी इच्छा से यह जान चुके थे कि महारानी के दोनो बच्चे अल्पायु मे ही पुरे हो जाएंगे, लेकिन सच कहने की हिम्मत नही हो पायी और उन्होंने अपनी बात को प्रतीकात्मक छंदों में पेश किया | इस प्रकार वह अपनी बात भी कह गए और महारानी के मन को कोई चोट भी नहीं पहुंची | तभी से नास्त्रेदमस ने यह तय कर लिया कि वे अपनी भविष्यवाणीयां को इसी तरह छंदो मे ही व्यक्त करेंगें |

भविष्यवाणियाँ जो हुई सच साबित-

एक किंवदंती के अनुसार एक बार नास्त्रेदमस अपने मित्र के साथ इटली की सड़कों पर टहल रहे थे, उन्होनें भीड़ में एक युवक को देखा और जब वह युवक पास आया तो उसे आदर से सिर झुकाकर नमस्कार किया | मित्र ने आश्चर्यचकित होते हुए इसका कारण पुछा तो उन्होने कहा कि यह व्यक्ति आगे जाकर पोप का आसन ग्रहण करेगा | किंवदंती के अनुसार वास्तव मे वह व्यक्ति फेलिस पेरेती था जिसने १५८५ मे पोप चुना गया |

यदि नास्त्रेदमस की अन्य भविष्यवाणियों की बात करें जोकि सच साबित हुई है तो उनमें से बताया जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध, द्वतीय विश्व युद्ध, जापान पर अमेरिका द्वारा किया गया परमाणु हमला, हिटलर और नेपोलियन का उत्थान, अमेरिका का 9/11 हमला इत्यादि है |

अपनी मृत्यु के सम्बन्ध में भी कर दी थी भविष्यवाणी-

नास्त्रेदमस के जीवन के अंतिम साल बहुत कष्ट से गुजरे | फ्रांस का न्याय विभाग उनके विरूद्ध यह जांच कर रहा था कि क्या वह वास्ताव में जादू-टोने का सहारा लेते थे | यदि यह आरोप सिद्ध हो जाता, तो वे दंड के अधिकारी हो जाते। लेकिन जांच का निष्कर्ष यह निकला कि वे कोई जादूगर नही बल्कि ज्योतिष विद्या में पारंगत है | उन्हीं दिनों जलोदर रोग से ग्रस्त हो गए | शरीर मे एक फोड़ा हो गया जो लाख उपाचार के बाद भी ठीक नही हो पाया | उन्हें अपनी मृत्यु का पूर्वाभास हो गया था, इसलिए उन्होंने १७ जून १५६६ को अपनी वसीयत तैयार करवाई | एक जुलाई को पादरी को बुलाकर अपने अंतिम संस्कार के निर्देश दिए | २ जूलाई १५६६ को इस मशहूर भविष्यवक्ता का निधन हो गया | कहा जाता है कि अपनी मृत्यु की तिथि और समय की भविष्यवाणी वे पहले ही कर चुके थे |

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