राजनैतिक जुमलेबाज़ी के बाद भी नहीं सुधरी राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत

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बीघापुर(उन्नाव)- कहां तो तय था जरागाँ हर एक घर के लिए कहां चराग मयस्सर नहीं षहर के लिए। दुश्यन्त कुमार का यह षेर उन्नाव लालगंज राज मार्ग पर चरितार्थ है। वर्षों बीत गए नेताओं की जुमलेबाजी सुनते पर इस मार्ग की सूरत नहीं बदली। कोई इसे मुम्बई की सड़कों जैसा बनाने का दावा करता रहा तो कोई कानपुर लखनऊ राजमार्ग से अच्छा और मजबूत बनाने का दावा करता रहा किन्तु हकीकत कुछ अलग ही है। यह राजमार्ग अब भी गड्ढों से मुक्त नहीं हो सका है, इसकी मुम्बई से तुलना तो बहुत दूर की बात है।

पिछली सरकार में जहां नेताओं के बीच इस राजमार्ग को लेकर जमकर आरोप प्रत्यारोप का दौर चला और जनता मन मसोस कर रह गई। विधान सभा चुनाव के बाद जब प्रदेष में भी भाजपा की सरकार बन गई तो लोगों को विष्वास हुआ कि षायद अब इस राजमार्ग पर चार चांद लग जाएंगे लेकिन अब भी हालात वही हैं बद से बदतर। कहावत है कि आंधर आंखी पावै तौ पतियाय। आधे घर में तो उजाला हो गया है पर आधा घर अभी भी अंधेरे में है अर्थात उन्नाव से बीघापुर तहसील मुख्यालय पाटन तक का राजमार्ग अब भी निर्माण की बाट जोह रहा है। उसके आगे फिलहाल पाटन से सेमरी तक गड्ढा मुक्त कर दिया गया है। अब क्या कारण है कि आगे का कार्य रोक दिया यह तो राम ही जाने|

रिपोर्ट- मनोज सिंह

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