वोटिंग में NOTA का विकल्प रखना अनिवार्य : गुजरात हाईकोर्ट

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gujrat high court

गुजरात में नवम्बर में नगर पालिका, महानगर पालिका एवं पंचायतों के चुनाव घोषित किये गए है | हालही में जब पाटीदार आंदोलन जोरो पर है तब गुजरात में पाटीदारों के भाजपा के खिलाफ वोट करने पर कांग्रेस को कही फायदा ना हो जाये उस मनसूबे से NOTA का उपयोग कर सकते है ऐसी  भीति आनंदीबहन सरकार हो हो रही है, कुछ पाटीदार नेताओं ने वोटिंग के दौरान NOTA के उपयोग के लिए भी पाटीदार समाज को उकसाया है तब गुजरात सरकार चिंता में दिख रही है. इसलिए नवम्बरमे होने वाले चुनावमे NOTA का ऑप्सन ही न रखा जाये यह मनसूबा बनाया गया तब गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी और चुनाव आयोग सरकार के दबाव में गुजरात सरकार के एजंडे के मुताबिक काम कर रहा है और NOTA का ऑप्सन हटाने जा रहा हटी उसपर दाद मांगी गई थी |

गुजरात हाईकोर्टने उस याचिका पर अपना फैसला सुनाया है जिसमे चुनाव आयोग को फटकार लगायी गई है, हाईकोर्ट का कहना हे की NOTA का  विकल्प सुप्रीम कोर्ट ने दिया है  और यह देश नागरिको का हक़ है. जिससे चुनाव आयोग देश के मतदाताओं को वंचित नहीं रख सकता, सुंप्रीम कोर्ट ने जो प्रावधान रखा है उसपर चुनाव आयोग अपने आप स्वायत्त फैसला नहीं ले सकता और नवम्बर में गुजरात में होने वाले चुनावो में NOTA का ऑप्सन रखने का हुक्म जारी किया है, हाल में जब गुजरात का एक बहुत  बड़ा वर्ग अनमत आंदोलन के लिए सड़को ऊपर उतरा है तब NOTA का प्रावधान सरकार की मुसीबते बढ़ा सकता है और पिछले दो दशको से गुजरातमें सत्ता वंचित कांग्रेस का भी  अनमत आंदोलन का भरपूर लाभ उठाने के लिए मुह में पानी आना लाज़मी है, ऐसे में गुजरात मे भाजपा के ही पाटीदार मंत्रीओ और विधायको की भूमिका इस चुनाव में क्या रहेगी उसे लेकर सरकार और संगठन दोनों दुविधा में है, एक तरफ पाटीदारो को टिकट न दिया जाए तो भी नाराजगी बढ़ सकती है और दूसरी तरफ अगर पाटीदारो को टिकड़ दे तो पार्टी का टिकट लेकर भी पार्टी को धोखा देकर हरवा सकते है यह भी डर भाजपा की कमांडिंग ऑथोरिटी की चिंता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, उसमे NOTA का प्रावधान रखनेका गुजरात हाईकोर्ट का हुक्म गुजरात सरकार और भाजपा को एक बहोत बड़ा फटका माना जा सकता है |

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