वर्ष-2015 के दौरान परमाणु ऊर्जा विभाग की उपलब्धियां और निष्‍पादन विशेषताएं |

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nuclearवर्ष-2015 के दौरान, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) ने समाज के लाभ और ऊर्जा सुरक्षा और उनके माध्‍यम से राष्‍ट्र निर्माण के प्रति योगदान के लिए विभिन्‍न पहलों का शुभारंभ किया है।

विभाग की उपलब्धियों की मुख्‍य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

ऊर्जा सुरक्षा

परमाणु ऊर्जा विभाग ने डॉ. होमी जहांगीर भाभा की परिकल्‍पना  और अंतर्राष्‍ट्रीय असैन्‍य परमाणु सहयोग पर आधारित अतिरिक्‍त सुविधाओं के माध्‍यम से भारत में तीन स्‍तरीय स्‍वदेशी परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और उनके माध्‍यम से देश के ऊर्जा मिश्रित विकल्‍पों में योगदान को आगे बढ़ाया है।

  • 5,680 मेगावाट विद्युत की कुल स्‍थापित उत्‍पादन क्षमता के साथ कुल 21 परमाणु ऊर्जा रियक्‍टर हैं। द न्‍यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने 01.01.2015 से 15.12.2015 तक की समान अवधि के दौरान 77 प्रतिशत के समग्र क्षमता घटक और 79 प्रतिशत के उपलब्‍धता घटक के साथ 36,826 मिलियन इकाईयों का विद्युत उत्पादन किया।
  • वर्तमान में 10 और रिएक्‍टर निर्माणाधीन हैं। इनसे 7,700 मेगावाट की अतिरिक्‍त क्षमता हासिल की जायेगी और इसके परिणामस्‍वरूप इन रिएक्‍टरों का निर्माण पूर्ण होने पर 13,380 मेगावाट की कुल स्‍थापित क्षमता तक पहुंचा जा सकेगा।
  • मध्‍यप्रदेश में चुटका और राजस्‍थान के बैंसवारा में दो नये स्‍थलों के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है।
  • नागरिक दायित्‍व के लिए परमाणु क्षति अधिनियम-2010 के अंतर्गत निर्धारित दायित्‍वों को शामिल करने हेतु बीमा प्रदान करने के लिए 1500 करोड़ रूपये की क्षमता के साथ भारतीय बीमा पूल (आईएनआईपी) का शुभारंभ जून, 2015 में मैसर्स जनरल इंश्‍योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा किया गया।
  • भारत में असैन्‍य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहलें:

v     भारत और अमरीका के बीच भारत के सीएलएनडी अधिनियम और इसके प्रावधानों पर सहमति बनी। इसके अलावा भारत-अमरीका असैन्‍य परमाणु सहयोग समझौते के अंतर्गत भारत और अमरीका के बीच प्रशासनिक व्‍यवस्‍था के दस्‍तावेज को भी अंतिम रूप दिया गया।

v    फरवरी 2015 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों में सहयोग के लिए श्रीलंका के साथ अंतर-सरकारी समझौता।

v    फ्रांस की एआरईवीए कंपनी और एनपीसीआईएल के बीच पूर्व-अभियांत्रिकी समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए।

v    कुडनकुलम इकाई 3 और 4 के संदर्भ में रूसी संघ के साथ आम प्रारूप समझौते के लिए अनुपूरक, रूसी संघ के साथ भविष्‍य में सहयोग पर अभिकल्‍पना दस्‍तावेज का गठन।

v    परमाणु ऊर्जा विभाग इकाईयों के द्वारा ‘’मेक इन इंडिया’’ लक्ष्‍य के अनुरूप हमारे 700 मेगावाट स्‍वदेशी दबाव युक्‍त भारी जल रिएक्‍टरों (पीएचडब्‍ल्‍यूआर) के लिए स्‍वदेशी घटकों और कुछ महत्‍वपूर्ण व्‍यापक आकार के उपकरणों को विकसित और विनिर्माण करने के प्रयास।

v    सरकार ने व्‍यापक पैमाने पर ईंधन सुविधाओं को जुटाने और इसकी उपलब्‍धता को सहज बनाने के लिए घरेलू और विदेशी दोनों ही स्रोतों से ईंधन की आपूर्तियों में वृद्धि के लिए महत्‍वपूर्ण प्रयास किये हैं। इस संदर्भ में, अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान पांच वर्षों के लिए 3000 टन यूरेनियम अयस्‍क की आपूर्ति के लिए एक समझौता किया गया था।

v    दिसम्‍बर 2015 में परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों में सहयोग के लिए भारत और जापान के बीच एक समझौते पत्र पर हस्‍ताक्षर किये गये।

 

 

  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) ने सितम्‍बर 2015 में कनाडा के परमाणु सुरक्षा आयोग (सीएनएससी) के साथ परमाणु नियामक सूचना के आदान-प्रदान और सहयोग के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय प्रबंधों पर हस्‍ताक्षर किये।
  • भारत और ब्रिटेन के बीच अक्‍टूबर, 2015 में एक परमाणु सहयोग समझौते (एनसीए) पर हस्‍ताक्षर किए जा चुके हैं।
  • परमाणु ऊर्जा साझेदारी के लिए भारतीय अंतर्राष्‍ट्रीय केन्‍द्र के साथ सहयोग के लिए ब्रिटेन ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन विभाग, उत्‍तरी आयरलैंड और भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच एक समझौते ज्ञापन पत्र पर हस्‍ताक्षर किए गये।

सामाजिक लाभ के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग की प्रौद्योगिकियां:

 

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की मई 2015 में की गई मंगोलिया की यात्रा के दौरान टीएमसी और राष्ट्रीय कैंसर सेंटर, मंगोलिया के बीच हुए एक समझौते के तहत मंगोलिया में नवंबर, 2015 में एक भाभाट्रोन की एक यूनिट की हाल ही में स्थापना की गई है।
  • विट्रफाइ सीज़ियम -137 पेंसिल बीएआरसी द्वारा विकसित की गई जो विश्व में अपनी किस्म की ऐसी पहली पेंसिल है। जिसे बीएआरसी द्वारा उच्च स्तर के अपशिष्ट से रिकवरी करके विकसित किया गया है। बीआरआईटी-डीएई द्वारा उत्पादित रक्त इरेडियेटर इकाइयों में उपयोग के लिए 10 पेंसिलों के पहले सेट की आपूर्ति की गई है।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियां पर्यावरण सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करती हैं और बदले में स्वच्छ भारत अभियान का समर्थन में सहायता प्रदान करती हैं। ऊर्जा और खाना पकाने की गैस के उत्पादन के लिए जैव-अपशिष्ट की प्रौसेसिंग के लिए आठ बीएआरसी बायोगैस संयंत्र इस वर्ष स्थापित किया गया है। जिससे ऐसे संयंत्रों की कुल संख्या बढ़कर 198 हो गई है। बीएआरसी ने शहरी सीवेज और कीचड़ के सुरक्षित निपटान के लिए बीएआरसी ने रेडिएशन स्वच्छता का प्रदर्शन किया है। जिसमें परिणामी सहउत्पादन का कार्बनिक खाद के रूप में उपयोग की संभावना भी दर्शायी।  अहमदाबाद में शुष्क सीवेज, कीचड़ का अधिक स्वच्छ तरीके से निपटान के लिए अहमबाद में रेडिएशन संयंत्र की स्थापना करने की योजना है।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग स्वच्छ गंगा परियोजना की सहायता के लिए जल गुणवत्ता विश्लेषण पहलुओं में एक प्रौद्योगिकी प्रदाता-सह सलाहकार के रूप में भाग ले रहा है।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा सीईआरएनएस-एलएचसी की एसोसिएट सदस्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके साथ डीएई इकाइयों का सक्रिय सहयोग चल रहा है और इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई है।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) का आदर्श वाक्य है ‘राष्ट्र की सेवा में परमाणु’ और इस दिशा में यह छह प्रमुख क्षेत्रों को परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लाभों को लगातार पहुंचा रहा है। ये 6 क्षेत्र हैं-  ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग के माध्यम से विश्व स्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति का सतत विकास करना। सरकार और परमाणु ऊर्जा विभाग भारतीय परमाणु कार्यक्रम को और ऊंचा उठाने तथा देश का स्थायी चहुंमुखी विकास करने के लिए समाज को मूल्यवान सेवा प्रदान करने के उद्देश्य के लिए आगे बढ़ने को आतुर हैं।

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