सीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखा रहे अधिकारी, डीएम नाराज 

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उरई/जालौन ब्यूरो : मुख्यमंत्री के आदेशों का असर जिले के अधिकारियों पर नहीं हो रहा है। हालत यह है कि बार-बार शासन व जिलाधिकारी के कहने के बाद भी जिला स्तरीय अधिकारी जनसुनवाई के समय में अपने कार्यालय में नहीं बैठ रहे हैं। बात केवल यहीं पर खत्म नहीं होती। एक तो यह अधिकारी खुद अपने कार्यालय मंे नहीं बैठ रहे और दूसरी ओर यह अधिकारी जिलाधिकारी के कार्यालय में बैठकर उनके कार्य में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई है और जिला स्तरीय इन अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि वह जनसुनवाई के समय में उनके कार्यालय में आकर कार्य में व्यवधान न डालें और अपने कार्यालय में ही रहकर जनसुनवाई करें। अन्यथा वह प्रशासनिक कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे। 

प्रदेश का निजाम भले ही बदल गया हो और सूबे के मुखिया द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हों। पर अपनी लापरवाह कार्यशैली को सुधारने के लिए कुछ अधिकारी अभी भी गंभीर नहीं हुए हैं। इसके चलते सोमवार को जिलाधिकारी का पारा चढ गया और उन्होंने जिला स्तरीय कुछ अधिकारियों को पत्र लिखकर साफ कह दिया कि वह जनसुवनवाई के समय में अपने ही कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, सिटी मजिस्टेट, मुख्य चिकित्साधिकारी, जिले के सभी उपजिलाधिकारी को एक पत्र भेजा है। जिसमें उन्होंने कहा कि शासन द्वारा यह आदेश दिए गए हैं कि अधिकारी प्रत्येक कार्य दिवस में सुबह नौ बजे से 11 बजे तक अपने कार्यालय में उपस्थित रहकर जनसुनवाई करेंगे। पर यह देखा जा रहा है कि कई जिला स्तरीय अधिकारी उक्त समय में अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं होते हैं। बल्कि इसी समय में वह जिलाधिकारी से संपर्क करने या किसी प्रकरण मंे विचार-विमर्श के लिए उनके ही कार्यालय मं पहुंच जाते हैं। इससे उक्त अधिकारी खुद तो शासन के आदेशों का उल्लंघन करते ही हैं, इसके साथ ही जिलाधिकारी के कार्य में भी व्यवधान उत्पन्न करते हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि अधिकारी जनसुनवाई के समय में उनके कार्यालय में न आएं। अगर कोई आवश्यक वार्तालाप करनी हो तो वह सीयूजी नंबर या कार्यालय के दूरभाष नंबर से उनसे संपर्क कर सकते हैं। अगर इसके बाद भी उनकी आदत में सुधार नहीं होता है तो वह प्रशासनिक कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे। 

रिपोर्ट – अनुराग श्रीवास्तव

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