दक्षिण चीन सागर के मामले पर चीन ने भारत और अमेरिका को एक साथ दी धमकी

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दिल्ली- चीन ने विवादित दक्षिण सागर के मामले पर भारत और अमेरिका को एक साथ चेताया है I चीन ने कहा है कि जो क्षेत्र दक्षिण चीन क्षेत्र के बाहर के है उन्हें इस मामले में बोलने का कोई हक़ नहीं है I चीन की तरफ से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि जो देश इस क्षेत्र के नहीं है उन्हें यहाँ दखलंदाजी करने का कोई हक़ नहीं है I

आपको बता दें कि भारत में चीन के राजदूत ले युचेंग ने शनिवार को अमेरिका और भारत को वस्तुत: संदेश देते हुए यहां कहा कि उन देशों को इन मुद्दों पर दखलअंदाजी नहीं करनी चाहिए जो क्षेत्र से बाहर के हैं या जिनका क्षेत्र से सरोकार नहीं है। उन्होंने यह बात एशिया प्रशांत के संदर्भ में भारत और बड़ी ताकतों के बीच संवाद पर आयोजित डेक्कन हेराल्ड के एक कार्यक्रम में कही।

भाजपा नेता राम माधव ने चीनी राजदूत की इस चेतावनी का तीखा प्रतिकार किया। उन्होंने यह कहते हुए नौवहन की स्वतंत्रता की वकालत की कि जिस तरह हिंद महासागर भारत का नहीं है और दुनिया के दूसरे देश इसकी साझेदारी करते हैं, उसी तरह का मामला दक्षिण चीन सागर का भी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह चीन ने इस सदी में वैश्विक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया है, उसी तरह उसे क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देना चाहिए। माधव ने कहा कि क्षेत्र को एशिया-प्रशांत के बजाय हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) कहना चाहिए क्योंकि यह व्यापक संदर्भ है। दक्षिण चीन सागर में नौवहन की आजादी की वकालत करते हुए भारत ने विवाद के शांतिपूर्ण समाधान का पक्ष लिया है और कहा कि हाइड्रोकार्बन से मालामाल सागर में उसके आर्थिक हित हैं।

चीनी राजदूत ने स्प्राटली द्वीप समूह पर भी चीनी दावा दोहराया। यह द्वीपसमूह दक्षिण चीन सागर में विवाद का मुख्य बिंदु है। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद द्वीपसमूह को जापान से फिर से हासिल किया गया था और 1970 तक इस पर कोई दावेदार नहीं था। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद चीन ने जापानी कब्जे से द्वीपसमूह को हासिल किया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद के लंबे समय तक किसी ने इन द्वीपसमूहों पर चीनी दावे को चुनौती नहीं दी। चीनी राजदूत ने कहा…ऐसे देश जो क्षेत्र के नहीं हैं और जो अपनी शक्ति दिखाते हैं, यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। ले ने कहा कि चीन वार्ता के लिए तैयार है और उसने आसियान देशों के ‘दक्षिणी चीन सागर में बर्ताव की घोषणा’ पर पहले ही दस्तखत कर चुका है जिसमें मुद्दे के शांतिपूर्ण हल के लिए शर्तें तय की गई हैं।

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