एक अकेले हिन्दुस्तानी ने बचाई थी 1,70,000 हिन्दुस्तानियों की जान, यह आज भी दुनिया का सबसे बड़ा मिशन है

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आज से 25 साल पहले 1990 में भारत ने दुनिया के सबसे मिशन को अंजाम दिया था I आपको यह बात जानकार सबसे ज्यादा आश्चर्य होगा कि इस पूरे मिशन को जिस एक व्यक्ति ने अंजाम देने में भारत सरकार की मदद की थी वह कोई सेना या फिर सरकारी व्यक्ति नहीं बल्कि एक गैर सरकारी कुवैत में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा व्यापारी था और जिसका नाम था रंजीत कात्याल I

आपको बता दें कि यह वही सख्स है जिसके ऊपर बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षयकुमार आजकल एक फिल्म बना रहे है जिसका नाम है ‘एयरलिफ्ट’ I जी हाँ अक्षय कुमार इस फिल्म में जो किरदार निभा रहा है वही है भारत के कुवैत में रहने वाले सबसे बड़े बिजनेसमैन रंजीत कात्याल I

tank in iraq
कुवैत में घुसते हुए इराकी टैंक

रंजीत कात्याल ही वह सख्स थे जिन्होंने अपनी जिंदगी को खतरे में डालकार कुवैत के भीतर रहते हुए 1,70,000 हिन्दुस्तानियों को कुवैत से 4,117 किमी दूर मुंबई भेज दिया था I आपको बता दें कि रंजीत कात्याल ही वह सख्स थे जिन्होंने ईराक के सैनिक तानाशाह सद्दाम हुसैन से भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्रकुमार गुजराल की मुलाकात करवाई थी जिसके बाद भारत सरकार ने दुनिया के इस सबसे बड़े मिशन को अंजाम दिया था I

भारत सरकार ने इस पूरे मिशन को अंजाम देने के लिए केवल और केवल 59 दिन लगाये और इतना ही नहीं भारत सरकार की तरफ से 1,70,000 हिन्दुस्तानियों को कुवैत के रणक्षेत्र से बाहर निकालने 488 बार एयर इंडिया को उड़ान भरनी पड़ी थी I

सद्दाम हुसैन के हमले के कारण फँस गए थे हिन्दुस्तानी –

saddam husain time of gulf war
तत्कालीन इराकी सैन्य तानाशाह सद्दाम हुसैन

1990 के दशक में ईराक के तत्कालीन तानाशाह सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला बोल दिया था I यह हमला तेल के कारोबार को लेकर किया गया था I सद्दाम हुसैन के हमले के बाद ईराक की सेना ने कुछ घंटो के भीतर ही पूरे कुवैत में तबाही मचा दी थी I जिसके बाद कुवैत में रह रहे 1 लाख 70 हजार हिन्दुस्तानियों के सर पर मौत नाचने लगी थी I

सद्दाम हुसैन ने ईराक से 1990 में कहा था कि वह अपने यहाँ कच्चे तेल का उत्पादन कम से कम कर दे I लेकिन कुवैत ने ऐसा करने से मना कर दिया था जिसके बाद ईराक ने 2 अगस्त 1990 में कुवैत के ऊपर हमला बोल दिया था I

कुवैत में हुए ईराक के हमले के बाद कुवैत के राजघराने के लोगों ने कुवैत को छोड़कर सऊदी अरब में जाकर शरण ले ली थी और वहाँ पर रह गए थे सीधे-साधे नागरिक I जिनके सर पर ईराकी सेना के द्वारा मौत का खतरा मडराने लगा था I

ऐसे मुश्किल के समय में रंजीत कात्याल बना 1,70,000 हिन्दुस्तानियों के लिए मसीहा –

ऐसी विषम परिस्थितियों के वक्त जब 1 लाख 70 हजार हिन्दुस्तानी अपने मुल्क की तरफ एक निराशा के भाव से देख रहे थे उन्हें इस बात की बिलकुल भी आशा नहीं थी कि अब उन्हें वहाँ से कोई बचा पाएग और वह कभी हिंदुस्तान अपने मादरे वतन पहुँच पायेंगे तो ऐसे ही समय में रंजीत कात्याल अपने देशवासियों के लिए मसीहा साबित हुए थे I

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एयर इंडिया के जहाज से हिंदुस्तान वापस आते भारत वासी

रंजीत कात्याल के बारे में कहा जाता था कि वह अपने आपको भारतीय से ज्यादा कुवैती मानता था लेकिन एक दिन जब भारत माता के बच्चों पर खतरा मंडराया तो वही रंजीत कात्याल पूरे 1 लाख 70 हजार हिन्दुस्तानियों के लिए ढाल बन गया I बताते है कि रंजीत कात्याल ही वह सख्स थे जिनके प्रयास से सद्दाम हुसैन और तत्कालीन विदेशमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की मीटिंग हो सकी जिसके बाद एक-एक हिन्दुस्तानी को भारत लाया जा सका I

दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान चलाया भारत ने –

भारत सरकार के द्वारा चलाया गया वह अभियान अब तक का किसी भी दूसरे देश में किसी देश के द्वारा चलाया गया सबसे बड़ा बचाव अभियान है I इस अभियान को गिनीज बुक ऑफ़ द वर्ल्ड रिकार्ड बुक में भी दर्ज किया गया है I सबसे बड़ी बात आज के लोगों के लिए यह है कि आज जरा सा एक उड़ान लेट हो जाने पर या कोई छोटी सी खराबी या फिर किसी भी कारण से आप जिस एयर इंडिया को गाली देते है एक दिन जब 1,70,000 हिन्दुस्तानियों की जान किसी दूसरे देश में खतरे में पड़ गयी थी तब इसी एयर इंडिया ने लगातार 488 उड़ाने भर करके एक हिन्दुस्तानी को मात्र 59 दिनों के अन्दर मुंबई से 4,117 किमी दूर स्थित कुवैत से चुन लायी थी I

by Dharmendra Singh

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