झोलाछाप डॉक्टरों की चल रही खुलेआम मनमानी

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क्रेडिट- वेबदुनिया

सफीपुर(उन्नाव ब्यूरो)– जनपद के क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है जिससे कि आम जनमानस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है| लाचार गरीब मरीजों से धना दोहन के साथ साथ उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है| झोलाछाप डॉक्टरों की लोकप्रियता देखते हुए हमारे क्षेत्र के जनप्रतिनिधी भी खुलकर विरोध नहीं करते है| लगभग पूरे क्षेत्रों झोला छाप डाक्टरों की मनमानी चारो तरफ चल रही है। सफीपुर क्षेत्र में सरकारी अस्पताल अपनी विश्वनियता तथा निःशुल्क चिकित्सा व्यवस्था की वजह से ग्रामीणों के लिए वरदान से कम नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डाक्टरों की अनुपलब्धता की वजह से यह सरकारी अस्पताल मात्र सो पीस बनकर रह गये है| अगर सफीपुर नगर की बात करें तो जिस तरफ देखोगे तो आपको हर दो सौ मीटर की दूरी पर झोला छाप डाक्टरों का क्लीनिक दिखाई पङेगा| जहां सरकार भ्रूण हत्या रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, वहीं इस क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा भ्रूण हत्या जैसे महापाप को भी आसानी से अंजाम दिया जाता है| ज्यादा तर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल सप्ताह में एक या दो दिन ही खुलते है| अस्पताल जब खुलते भी हैं तो डाक्टर नदारत मिलते हैं|

स्वास्थय केंद्र में फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखते हैं और दवाइयां भी देते हैं| कभी-कभी डाक्टरों की उपस्थिति देखने को मिल जाती है| जिससे ग्रामीणों में खुशी देखने को मिलती है जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का वर्चस्व कायम है जो लाचार मरीजों से धना दोहन के साथ साथ उनके जीवन से खिलवाड़ करते है। विकास खण्ड सफीपुर क्षेत्र में बहत्तर ग्राम पंचायत है जिसमें प्रमुख रूप से बम्हना, सैरपुर,ओसिया, पीसी, मुंडा, सराय स्किन, मिर्जापुर, जमालनगर, सलीम, देवगांव आदि लगभग पूरा विकास खंड के ग्रामीण झोला छाप डाक्टरों की तपिश में जल रहे है| सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की कमजोरी का लाभ उठाकर झोला छाप डाक्टरों ने अपना सम्राज स्थापित करने रखा है| इन डाक्टरों की स्थानीय स्वास्थ और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत रहती है|

डाक्टरों की लापरवाही से कई जानें भी चली गयी उसके बाद भी जिला के स्वास्थय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे है| जनपद से लगाकर क्षेत्र के स्वास्थ अधिकारियों को झोलाछाप डॉक्टरों का हर महीने का कमीशन पहुंच जाता है, इसीलिये इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है| क्षेत्र के मरीजों के लिए झोला छाप डाक्टर अपनी मनमानी से दवा लिखकर मगवाते है डाक्टर दवा वही लिखते है जिस दवा में कमीशन ज्यादा मिलता है| एक और बात सामने आयी है कि जो दवा लिखी जाती है वह हर जगह उपलब्ध नहीं रहती है सिर्फ एक या दो मेडिकल पर उपलब्ध रहती है, जिससे डाक्टरों को कमीशन अधिक से अधिक मिलता है| जिसमें ऊपर से लेकर नीचे तक स्वास्थय अधिकारियों का कमीशन पहुंच जाता है इसीलिये क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ जैसी आ गयी है|

जिले के स्वास्थय अधिकारी क्या किसी बङी घटना का इंतजार कर रहे है? क्षेत्रों में कई बार अधिकारियों ने छापामारी की लेकिन उसके बाद भी नतीजा यह देखने को मिला है कि सिर्फ धन की उगाही करने के लिए छापेमारी की जाती है| इन डाक्टरों की लोकप्रियता को देखते हुए हमारे क्षेत्र के जनप्रतिनिधी भी उनके घिनौने वाले खतरनाक कारनामों का खुलकर विरोध नहीं करते बल्कि कई बार इन डाक्टरों पर कार्रवाई होने पर भी इनके पछ में खङे हो जाते हैं| इन गरीब ग्रामीणों के बीच टीवी, मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियां फल फूल रही है| ऐसे खतरनाक डाक्टरों से इलाज करवाने से साधनहीन ग्रामीणों के खेत, बगीचे, बर्तन भी बिक जाते है लेकिन जिला प्रशासन व उच्चाधिकारी कुम्भकरणी नींद में सो रहे है| क्या इंही ग्रामीणों पर झोला छाप डाक्टरों का कहर रुपी अत्याचार जारी रहेगा? अगर सफीपुर नगर की बात करें तो मुख्य मार्ग की बात करें तो चारों तरफ आपको झोला छाप डाक्टर ही नजर आयेगें। इनका वर्चश्व नगर में इस तरह से कायम है कि कोई भी जनप्रतिनिधि व आलाधिकारियों के सहित तथा राज नेताओं को मोटी रकम पहुंचा देने के कारण इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है|

प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार हर महीने में करोड़ों रुपये का राजस्व खर्च करती है, वही नगर के कुछ झोला छाप डाक्टरों द्वारा ऐसे घिनौने कार्य को आसानी से अंजाम दे दिया जाता है जो सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पे पानी फेरते नजर आ रहे है| इस पर सफीपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व जिला के संबंधित अधिकारी झोला छाप डाक्टरों पर लगाम लगाने में सफल हो पाते है कि नहीं यह आने वाला वक्त ही बतायेगा।

रिपोर्ट- रामजी गुप्ता

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