संविधान सम्मान यात्रा के काशी आगमन कर किया गया संगोष्ठी का आयोजन

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वाराणसी : जन आंदोलनों के रास्ट्रीय समन्वय के तत्वावधान में आयोजित देशव्यापी “सम्विधान सम्मान यात्रा” के काशी पहुंचने पर स्थानीय सामाजिक संगठनों द्वारा भव्य स्वागत किया गया, यात्रादल के सदस्यों को हस्तकला द्वारा निर्मित उपहार प्रदान किये गये |

इस अवसर पर पराड़कर स्मृति भवन में साझा संस्कृति मंच एवं नागरिक प्रयास मंच द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित “लोक तन्त्र की मांग: संविधान सम्मान” विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने देश में संविधान की अवहेलना और निरादर की बढती घटनाओं को निंदनीय बताया और कहा कि हमारे देश का संविधान दुनिया के अच्छे संविधानो में से एक है. किसी भी व्यवस्था में लोगों को अपने अधिकारों को पाने व पाए अधिकारों अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर संघर्ष करते रहना पड़ता है। समय पर चुनाव होना और मतदान देना मात्र ही लोकतंत्र नहीं है।

यात्रा के बारे में बताते हुए अरुंधती धुरु ने कहा कि आज माननीय उच्चतम न्यायालय सहित न्यायाधीशों पर भी दबाव बनाने की खतरनाक प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, सोशल मीडिया और मुनाफाखोर कार्पोरेट जगत द्वारा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए संगठित तरीके से अभियान चलाये जा रहे हैं ऐसे में स्पष्ट है कि खतरा हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर है. संविधान के घटते सम्मान को वापस लाने की समसामयिक मांग है. इसी के दृष्टिगत जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) के तत्वावधान में देशव्यापी “संविधान सम्मान यात्रा” का आयोजन किया गया है. यह राष्ट्रव्यापी यात्रा दो अक्टूबर को गुजरात के दांडी से शुरू हुयी है और दिल्ली में 10 दिसंबर को समाप्त होगी।

महाराष्ट्र की सामाजिक कार्यकर्त्री सुनीति एस आर ने कहा कि लोकतंत्र मानवीय मूल्यों, नैतिकता ,संवैधानिक सिद्धांतों लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और क्रियान्यनवन से लोक कल्याणकारी राज्य को फलीभूत करता है। तभी ”हम भारत के लोग” की संवैधानिक उद्देशिका जीवंत रहती है, जिसे हमने आजादी आंदोलन के लंबे संघर्षों और शहादतों से हासिल किया है।

मैग्सेसे पुरस्कार सम्मानित डा. संदीप पाण्डेय ने कहा कि आज माननीय उच्चतम न्यायालय सहित न्यायाधीशों पर भी दबाव बनाने की खतरनाक प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, सोशल मीडिया और मुनाफाखोर कार्पोरेट जगत द्वारा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए संगठित तरीके से अभियान चलाये जा रहे हैं ऐसे में स्पष्ट है कि खतरा हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर है. संविधान के घटते सम्मान को वापस लाने की समसामयिक मांग है |

संबोधित करते हुए स्वामी अग्निवेश ने कहा कि दुर्भाग्य से देश में नफरत की राजनीति हो रही है जिसकी आड़ में फासीवाद का देश के वंचित लोगों पर हमला है, जो सरकार सत्ता में आते ही संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाने लगती है।वह अब अपनी लगभग 5 साल की लूट और नाकामी को छिपाने के लिए मंदिर निर्माण पर कानून बनाने की देश बांटने की शातिर खतरनाक चाल चल रही है और कतिपय साधु, संत, महंत, मौलवी फादर, ग्रंथि हैं। जिनका काम धर्म के नैतिक मूल्यों, मैत्री, करुणा को समाज में फैलाने का है वे धर्म का चोला ओढ़ कर आग लगाने के लिए धर्मादेश दे रहे हैं। उन्हें नहीं पता यह देश संविधान के आदेश से विकसित होते हुए यहां तक आया है. हमारा मानना है कि यह लड़ाई हिंदू मुसलमान की नहीं बल्कि अमीर और गरीब की है |

पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्त्री सीमा आजाद ने कहा कि आम जन की व्यथा को सरकार तक पहुँचने के लिए लोकतान्त्रिक तरीके से किये जा रहे जन आंदोलनों को दमन करने की प्रवृत्ति बढी है जो लोक तंत्र के लिए खतरा है | सामाजिक कार्यकर्ताओं एस पी राय, सुकालो, ऋचा सिंह, सतीश सिंह, रवि शेखर, जागृति राही, डा अनूप श्रमिक, राम जन्म, वल्लभाचार्य पाण्डेय आदि ने गंगा सफाई, वायु प्रदूषण, आई. पी. डी. एस., काशी विश्वनाथ कारीडोर, सफाई कर्मियों, किसानो के मुद्दों पर सरकारों के जन विरोधी रवैये पर अपनी बात रखी. प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने अपनी जनवादी गीतों की प्रस्तुति से संगोष्ठी में उत्साह बढ़ा दिया |

अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिन्तक अमरनाथ भाई ने कहा कि कारपोरेट जगत द्वारा किसान, गाँव और प्राकृतिक संसाधनों का शोषण सरकारों के संरक्षण में किया जा रहा है जिससे आम आदमी का जीवन दुष्कर होता जा रहा है. ऐसे में एक जुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है. लोकतंत्र में सभी को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार प्रदान किया गया है | संगोष्ठी का संचालन फादर आनंद और धन्यवाद ज्ञापन डा अनूप श्रमिक ने किया. संगोष्ठी में प्रमुख रूप से मानवाधिकार जन निगरानी समिति, उदय संस्था, विश्व ज्योति गुरुकुल, अस्मिता लोक चेतना समिति, काशी कौमी एकता मंच, विजन संस्थान, रिदम आदि संस्थाओं के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही |

रिपोर्ट – राजकुमार गुप्ता

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