गिरी संप्रदाय के महात्मा बाबा हजारी गिरी के देवस्थान पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

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फतेहपुर चौरासी/उन्नाव(ब्यूरो)- सती ने राजा दक्ष के यहां अपने शरीर को त्याग कर पुनः हिमाचल पर्वत के घर पार्वती के रूप में प्रकट हुई थी। उन्होंने पुनः भगवान शिव को अपना पति बनाने के लिए कठोर तप किया और उस कठोर तप के बल पर उन्हे भगवान शिव की पत्नी के रूप में वरण कर लिया था ।

यह बात फतेहपुर चौरासी के गिरीसंप्रदाय के महात्मा बाबा हजारी गिरी के देवस्थान पर चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन आए श्रोता भक्तों को वक्ता शास्त्री सुदीप सिंह ने बताई। उन्होंने अपने संबोधन में भक्तों को शंकर विवाह की कथा सुनाते हुए बताया कि जब भगवान राम पृथ्वी पर नर लीला कर रहे थे उसी समय उनके दर्शन की इच्छा हेतु भगवान शंकर अपनी पत्नी सती के साथ धरती पर आए थे और जब भगवान शंकर ने भगवान राम को नमस्कार किया तो शती को शंकर की इस बात पर विश्वास नहीं किया कि सारे जगत के चराचर भगवान विष्णु नगर लीला कर रहे हैं किन्तु सती बार-बार शंकर के मना करने के बावजूद भी भगवान राम की परीक्षा लेने पहुंच गई। उन्होंने सीता का रूप रखकर भगवान शंकर की परीक्षा ली और जब पुनः भगवान शंकर के पास वापस पहुंची तो भगवान के पूछने पर झूठ बोल दिया कि मैंने कोई परीक्षा नहीं ली । शंकर ने अपनी आंखें बंद कर सती नें जो लीला की थी वह देखी और मन ही मन प्रतिज्ञा कर ली कि अब इस जन्म में इस शरीर से सती से भेंट नहीं होगी ।

आकाश से आकाशवाणी हुई कि अरे शंकर ऐसी प्रतिज्ञा कोई देव-दानवों पुरुष नहीं कर सकता है । तब सत्य उस प्रतिज्ञा को बार-बार शंकर से पूछती रही किंतु उन्होंने बताने से इंकार कर दिया। इसके बाद अपने पति से झूठ बोलने का परिणाम उनको यह मिला कि कुछ दिन बाद सती के पिता राजा दक्ष यज्ञ कर रहे थे जिसमें उन्होंने भगवान शंकर को नहीं बुलाया था और सती ने वहां बार-बार जाने का आग्रह किया तो शंकर ने यह कहते हुए कि बिना बुलाए कहीं नहीं जाना चाहिए और सती को जाने की आज्ञा दे दी थी । जब सती अपने पिता के घर पहुंची तो यज्ञ में अपने पति का भाग नहीं देखा तो इतनी क्रोधित हो गई कि उन्होंने अपने शरीर को यज्ञ के हवन कुंड में समर्पित कर दिया और यज्ञ का विनाश कर दिया। इसी के बाद माता सती ने हिमाचल पर्वत के यहां जन्म लिया और भगवान शंकर को अपना पति बनाने के लिए वर्षो तपस्या की कंदमूल फल व पत्ते का सेवन किया। उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शंकर ने पार्वती को अपनी पत्नी बना लिया ।उक्त श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन ग्राम पंचायत फतेहपुर चौरासी के प्रधान अवधेश कुमार द्वारा किया जा रहा है ।रात्रि में भगवान कृष्ण की लीलाओं का भी मंचन किया जा रहा है।

रिपोर्ट- रघुनाथ प्रसाद

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