जिले में नहीं थम रहा ओवरलेाडिंग का खेल

जालौन (ब्यूरो) योगी सरकार में भले ही ओवरलोडिंग को लेकर सख्ती दिखाई जा रह हो। पर जिले में इस पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। असर केवल इतना हुआ है कि यह खेल दिन मे न होकर रात के अंधेरे में हो रहा है। रात के समय ओवरलेाड बालू लदे टक तिरपाल लगाकर जिले से होकर गुजर जाते हैं। इस खेल में कई थानों की पुलिस की संलिप्तता भी सामने आ रही है। वहीं ओवरलोडिंग के खेल में शामिल लोग अधिकारियों की लोकेशन भी लेते रहते हैं। यह सब कुछ धडल्ले से चल रहा है और प्रशासन इसे रोक पाने में नाकाम नजर आ रहा है।

गौरतलब है कि सूबे के मुखिया की सख्ती के चलते ओवरलेाडिंग पर काफी हद तक अंकुश लग पाया है। पर जिले में यह सख्ती पूरी तरह प्रभ्ज्ञावी नजर नहीं आ रही है। जिले में बालू खनन बंद होने के बाद अब पडोसी राज्य मध्य प्रदेश से बालू के टक जिले में आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश से आने वाले ओवरलेाड बालू के टक रात के अंधेरे में जिले से होकर गुजर रहे हैं। माधौगढ, बंगरा उमरी, रामपुरा, पचनदा, के रास्ते होते हुए यह टक कुठौंद से होकर औरेया की ओर जा रहे हैं। रास्ते में पडने वाले थानों की पुलिस की संलिप्तता भी इसमें बताई जा रही है। वहीं ओवरलेाडिंग के खेल में शामिल लोग लोकेशन का खेल भी खेल रहे हैं। रात के समय अधिकारियों की लोकेशन जानकर यह ओवरलेाड टक निकलवाए जा रहे हैं। ओवरलोड बालू के उपर तिरपाल लगाकर इन टकों को पास कराया जा रहा है। बताया जाता है कि कई थानों के पुलिसकर्मी भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं और आंशिक लाभ के चलते वह इस ओवरलोडिंग के खेल को रूकवाने का बीडा नहीं उठा पा रहे हैं। यह हाल जब है, जब जिले के मुखिया जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने स्वयं लिखित आदेश जारी किए थे कि जिले में कहीं पर भी ओवरलेाडिंग न होने पाए। इसे रोकने के लिए कई संयुक्त टीमें भी गठित की गई थीं। पर ग्रामीण अंचलों में इस आदेश का असर देखने को नहीं मिल रहा है।

आखिर क्या है महाकाल?
ओवरलेाडिंग के खेल में इन दिनों महाकाल लिखे टकों का काफी दबदबा देखने को मिल रहा है। रात के अंधेरे में ओवरलोड बालू लादकर माधौगढ, रामपुरा, उमरी आदि रास्तों से होकर गुजरने वाले टकों में सबसे ज्यादा संख्या महाकाल लिखे टकों की है। इनके आगे एक स्काॅर्पियो गाडी भी चलती है। जिसके शीशों में काले रंग की फिल्म चढी हुई है और पीछे महाकाल लिखा हुआ है। साथ ही गाडी में भाजपा का झंडा भी लगा हुआ है। इससे सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा नेताओं के संरक्षण में यह ओवरलेाडिंग का खेल चल रहा है?

तो क्या कर रही शंकरपुर चौकी पुलिस
जिले में जितने भी बालू  लदे ओवरलेाड टक आते हैं वह सभी कुठौंद की शंकरपुर चैकी से होकर औरेया की ओर निकलते हैं। लेकिन इसके  बावजूद भी चैकी पुलिस द्वारा इन ओवरलोड टकों को लेकर न ही कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही इसे रेाकने के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शंकरपुर चैकी पुलिस क्या कर रही है? क्या चैकी पुलिस का संरक्षण भी ओवरलेाडिंग के खेल में शामिल लोगों को प्राप्त है?

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