एक स्वर्ण पदक विजेता एथलीट का दर्द

0
302

indrajeet

मै इन्द्रजीत सिंह एक एथलीट, मैंने हाल ही में चीन में हुई २१वीं एशियाई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भारत की ओर से गोला फेंक में गोल्ड मेडल जीता है लेकिन  बेरोजगारी के चलते लोगों से मांगकर जीने को मजबूर हैं |

मैंने पहला सीनियर इंटरनेशनल मैडल विश्व चैंपियनशिप 2013 में जीता इसके बाद 2014 में एशियाई खेलों में भारत के लिए कांस्य जीता |

हरबार विश्व स्तर पर देश को गौरवान्वित करने के बाद भी बेरोजगारी और अनदेखी के चलते आज भी मुझे विदेशी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए लोगों से उधार मांगकर जाना पड़ता है |

ओलंपिक 2016 में खिलाडियों की आर्थिक मदद के लिए बनाई गयी टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम में मेरा नाम दूसरी लिस्ट में है लेकिन उसका कुछ फायदा नहीं दिख रहा क्योंकि खिलाडियों को जो मदद देने का वादा किया गया है उसपर अभी तक कोई शुरुवात नही हुई है ओलंपिक में ज्यादा वक़्त नही है ऐसे में प्रैक्टिस का एक – एक दिन हमारे के लिए बहुत कीमती है |

इंजीनियर या डॉक्टर बनने में 4 – 5 साल लगते हैं लेकिन एक एथलीट 10 – 12 साल की ट्रेनिंग के बाद ही विश्व स्तर पर पहुँच पाता है और इसके लिए उसे देश और सरकार से मदद की बहुत ज़रूरत होती है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here