पाकिस्तान ने आतंक की फैक्ट्री कहे जाने वाले मदरसे को दिये 30 करोंड रुपये |

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इस्लामाबाद- पाकिस्तान को आतंकवाद को पालने और उसे सह देने की आदत कभी जाने वाली नहीं है भले ही उसके ऊपर अमेरिका भारत सहित दुनिया के कितने भी देश कितने भी प्रतिबन्ध क्यों न लगा लें पाकिस्तान कभी भी इस तरह की नापाक हरकतों से बाज आने वाला नहीं है |

हाल ही में पाकिस्तान ने इसका एक बड़ा उदाहरण पेश करते हुए पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंक की फैक्टरी कहे जाने वाले मदरसे जिसे युनिवरसिटी और जिहाद के नाम से कुख्यात मदरसे को 30 करोंड रूपये के आर्थिक अनुदान की घोषणा की है |

कई बड़े आतंकी सगठनों के प्रमुखों ने ली है इसी मदरसे से शिक्षा-
बता दें इस मदरसे का इतिहास यह रहा है कि यहाँ से पढ़कर कई आतंकी पाकिस्तान और उसके आस पास के देशों में आतंक का पर्याय बने हुए है | ऐसे देश जिन्होंने पाकिस्तान के इस मदरसे से आये आतंकियों के दर्द को झेला है उनमें से भारत प्रमुख देश है | अफगानिस्तान में आतंक का पर्याय बने हुए तालिबान का प्रमुख अख्तर मंसूर ने भी इसी मदरसे से पढ़ाई की है | हालाँकि फिलहाल अख्तर मंसूर को अमेरिका ने ड्रोन हमलों में मार गिराया है |

इसके अलावा इस मदरसे हक्कानी गुट का सरगना जलालुद्दीन हक्कानी, अलकायदा का एक नेता असीम उमर जैसे कई बड़े आतंकी और आतंकी संगठनों के मुखियाओं ने इसी कुख्यात मदरसे से तालीम हासिल की है और बाद में मानव और मानवता के हत्यारे बने |

पाकिस्तानी मिनिस्टर ने कहा कि हम बड़े गर्व से यह कह रहे है कि हमनें मदरसे कि मदद की –
बता दें कि जिस इलाके में यह मदरसा आता है उस क्षेत्र पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सत्ता में है और बता दें कि इसी पार्टी के नेता मिनिस्टर शाह फरमान ने विधानसभा में कहा है कि, ‘मै बड़े गर्व के साथ इस बात की घोषणा करता हूँ कि दारुल उलूम हक्कानिया नौशेरा को अपने वार्षिक खर्चों के लिए 30 करोंड रूपये सरकार की तरफ से दिए जायेंगे |

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