अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में हारा पाकिस्तान, सुनवायी ख़त्म और कोर्ट ने पाकिस्तान की ओर से पेश विडीओ तक नहीं देखा

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देश-विदेश: पाकिस्तान में भारतीय मूल के कुलभूषण जाधव को दी गई फांसी की सजा को लेकर भारत और पाकिस्तान करीब 18 साल बाद एक बार फिर हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) में आमने-सामने हैं। आई॰सी॰जे॰ ने पहले भारत की फिर पाकिस्तान की दलीलें सुनी और फिर पाकिस्तान को करारा झटका देते हुए उसकी तरफ़ से पेश किए गए जाधव के कबूलनामे के विडीओ को देखने से इंकार कर दिया। इस दौरान पाकिस्तान लगातार यह चिल्लाता रहा कि भारत द्वारा दायर की गयी याचिका ग़लत है और हिंदुस्तान ने आईसीजे को राजनैतिक थीयेटर के रूप में उपयोग किया है।

प्रतीकात्मक

आपको बता दें की पाकिस्तान द्वारा दलीलें पेश की गयी कि जाधव के पासपोर्ट पर अंकित नाम का हिंदुस्तान स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रहा है और जाधव के मामले में बियाना संधि लागू नहीं होती है। पाकिस्तान ने यहाँ तक कहा की यह उसके देश की सुरक्षा का मामला है इसलिए आईसीजे इस मामले में कोई फ़ैसला नहीं दे सकता है।

कोर्ट में भारत ने कहा की जाधव को बिना काउन्सलर ऐक्सेस के न्यायिक मदद के बिना ही फाँसी दी गयी और जाधव को उनकी माँ तक से नहीं मिलने दिया गया । कोर्ट में दलील दी गयी कि जाधव की गिरफ़्तारी के बाद भारत को कोई जानकारी नहीं दी गयी। इस मामले में भारत का पक्ष ले रहे वक़ील हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव के परिवार वालों का वीज़ा अभी तक पेंडिंग है और जाधव की गिरफ़्तारी के बाद भारत को कोई जानकारी नहीं दी गयी जिससे स्पष्ट होता है कि जाधव को पाकिस्तान में गिरफ़्तार नहीं किया गया बल्कि उसे ईरान से अगवा किया गया और ज़बरदस्ती उससे बयान लिया गया ।

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