पाकिस्तानी अखबार का दावा, आतंकी संगठनों को संरक्षण दे रहा है पाकिस्तान |

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सारी दुनिया के साथ – साथ अब पकिस्तान के अन्दर से भी यह आवाज उठने लगी है कि पाकिस्तान अताकियों और आतंकी संगठनों को पनाह दे रहा है | यह खबर एक पाकिस्तानी अखबार ने पकिस्तान सरकार पर यह आरोप लगाया है |

पकिस्तान के एक अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि किस तरह प्रतिबन्ध के बावजूद भी पाकिस्तान में आतंकी संगठन फल-फूल रहे हैं | इस रिपोर्ट में जिन सगठनों का जिक्र किया गया है उसमें हाफिज सईद का लश्कर-ए-तैयबा और मसूद अजहर के जैश-ए-मोहम्मद का भी नाम शामिल है |

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में केन्द्रीय गृहमंत्रालय की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक दबाव के के चलते जब किसी संगठन पर प्रतिबन्ध लगता है तो वह नए नाम से संगठित हो जाता है, गौरतलब है कि 1997 का आतंकरोधी कानून किसी संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने और वह दोबारा संगठित न हो इसकी निगरानी का अधिकार गृहमंत्रालय को देता है लेकिन पाकिस्तान सरकार ऐसा बिल्कुल नहीं करती है |

रिपोर्ट में यह बताया गया कि पाकिस्तान गृहमंत्रालय ने पिछले साल दिसम्बर में सीनेट में प्रतिबंधित संगठनों की सूची पेश की थी, जिसमे 61 संगठनों के नाम शामिल थे, इसके बाद नाही इस सूची को अपडेट किया गया नाही ये नाम सार्वजनिक किये गए | 2008 में मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबन्ध लगने के बाद उसने जमात-उड़-दावा नाम से नया संगठन बना लिया, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबन्ध के बावजूद सरकार ने इसे सिर्फ निगरानी सूची में रखा है और संगठन लगातार सक्रीय है | इसके अलावां भारत पर हुए कई आतंकी हमलों का जिम्मेदार संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर प्रतिबन्ध के बाद उसके मुखिया मसूद अजहर ने इसका नाम बदलकर खुदम-उल-इस्लाम रख दिया |
शिया विरोधी सिपाह-ए-साहबा पाकिस्तान (एसएसपी) पर 22 जनवरी 2002 को प्रतिबंध लगा। इससे जुड़े लोग मिल्ल्त-ए-इस्लामी के नए नाम से संगठित हो गए। नवंबर 2003 में इस पर भी प्रतिबंध लगा। इसके बाद अल-ए-सुन्नत वाल जमात के नाम से संगठन ने गतिविधियां शुरू कर दीं। 15 फरवरी 2012 को इसे भी प्रतिबंधित कर दिया गया, पर गतिविधियां बंद नहीं हुईं।

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