पाकिस्तान में पहली बार हिन्दुओं को मिला अल्पसंख्यक का दर्जा, पाकिस्तानी सीनेट ने पारित किया ऐतिहासिक हिन्दू विवाह विधेयक

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Pakistan-Senate

इस्लामाबाद- लम्बे अरसे से विवादों में फंसे पाकिस्तान में रह रहे हिन्दुओं के अस्तित्त्व के विधेयक को आखिरकार पाकिस्तानी संसद के द्वारा पारित ही कर दिया गया है | इस विधेयक के पारित हो जाने से पाकिस्तान में पहली बार हिंदू अल्पसंख्यकों को पहचान मिली है और अल्पसंख्यक होने का अधिकार मिला है। इस विधेयक को संसद का निचला सदन नेशनल असेंबली 26 सितंबर, 2015 को पारित कर चुकी है। राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद यह कानून में तब्दील हो जाएगा। इससे हिंदू महिलाओं के जबरन धर्मांतरण पर रोक लगेगी।

आपको बता दें कि पाकिस्तानी सीनेट ने इस बिल को बीते शुक्रवार को अपनी मंजूरी दे दी है जबकि पाकिस्तानी संसद के निचले सदन ने इसे पहले ही 15 सितंबर 2015 को पहले ही मंजूरी दे चुकी है | अब कानून का रूप लेने के लिए इसे केवल राष्ट्रपति के दस्तखत की दरकार है जोकि मात्र एक औपचारिकता है |

‘डॉन न्यूज’ ने खबर दी है कि पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू इस विधेयक को व्यापक तौर पर स्वीकार करते हैं क्योंकि यह शादी, शादी के पंजीकरण, अलग होने और पुनर्विवाह से संबंधित है| इसमें लड़के और लड़की दोनों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल तय की गई है| इस विधेयक की मदद से हिन्दू महिलाएं अब अपने विवाह का दस्तावेजी सबूत हासिल कर सकेंगी|

यह पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए पहला पर्सनल लॉ होगा जो पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में लागू होगा| सिंध प्रांत पहले ही अपना हिन्दू विवाह विधेयक तैयार कर चुका है| आपको बता दें कि इस विधेयक को सीनेट के समक्ष कानून मंत्री ज़ाहिद हमीद ने पेश किया जिसका किसी ने विरोध नहीं किया | किसी भी पार्टी के द्वारा विरोध न किये जाने के बाद यह बिल मिनटों में ही ध्वनि मत से पास हो गया है |
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