दिल्ली पर बम-बारी करना चाहता था पाकिस्तान –

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बाएं से...जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल
बाएं से…जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल

जिस समय 13 सितंबर 1948 को जब सरदार वल्लभभाई पटेल के आदेश पर भारतीय सेना ने हैदाराबाद पर हमला बोला था उस दिन भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और गवर्नर जनरल राजगोपाल चारी बहुत ही अधिक चिंतित थे I उस समय के तत्कालीन जनरल राय बुचर ने जवाहरलाल नेहरु और राजा जी को बताया था कि सरदार जिस तरह से हैदाराबाद पर हमला करवा रहे है पाकिस्तान और सऊदी अरब हमारे ऊपर बम वर्षा कर सकते है I तत्कालीन सेना प्रमुख के मुताबिक गुजरात के अहमदाबाद, महाराष्ट्र के मुंबई आदि प्रमुख शहरों पर सऊदी अरब के और पाकिस्तान के जहाज बमों की वर्षा कर सकते हैं I लेकिन जब ऑपरेशन पोलो को चलाये हुए 24 घंटे से अधिक का समय बीत गया और ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तो उस समय उनकी वही चिंता मुश्कान में बदल गयी I

 

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा हम दिल्ली पर तो बम गिरा ही सकते हैं  –

लेकिन जिस समय भारतीय सेना ने ऑपरेशन पोलो प्रारंभ किया था उसी समय पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने अपनी डिफ़ेंस काउंसिल की बैठक बुला ली थी जिसमे उसने पूछा कि क्या हैदाराबाद की मदद के लिए पाकिस्तानी सेना कोई एक्शन ले सकती है ?

तभी वहां बैठक में मौजूद ग्रुप कैप्टेन एलवर्दी (जो बाद में एयर चीफ़ मार्शल और ब्रिटेन के पहले चीफ़ ऑफ डिफ़ेंस स्टाफ़ बने) ने कहा, “नहीं” I

यह सुनकर लियाकत अली को अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ और उसने जोर देकर पूछा की क्या हम दिल्ली पर तो बम गिरा ही सकते है ?

एलवर्दी ने जवाब दिया था कि “हाँ” ये संभव तो है ! लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी कह दिया कि इस समय पाकिस्तान के पास कुल चार ही बमवर्षक हैं जिनमें से सिर्फ़ दो काम सिर्फ दो ही काम कर रहे हैं I अब जो बचे हुए दो है उनकी हालत यह है कि इनमे से शायद एक दिल्ली तक पहुँच कर बम गिरा भी दे लेकिन इनमें से कोई वापस नहीं आ पाएगा I”

 

मेजर जनरल जे.एन.चौधरी
मेजर जनरल जे.एन.चौधरी

अब तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सभी अरमानों पर एक तरह से पानी पड़ चुका था I उसने और उसके कायदे आज़म ने हैदरबाद को जो भारत से अलग करके अपने में मिलाने का सपना देखा, भारत को टुकड़ों में बाटने का जो सपना था वह उसकी आँखों के सामने पूर्णतः ध्वस्त होता हुआ दिख रहा था I और छटपटाने के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहा था I

 

भारतीय सेना ने नियत समय पर हैदरबाद पर तीन तरफ से हमला बोला और देखते ही देखते पूरे हैदरबाद को अपने कब्जे में ले लिया I भारतीय सेना की तरफ से पूरे अभियान की जिम्मेदारी संभाली थी मेजर जनरल जे.एन.चौधरी ने और इस ऑपरेशन का नाम सेना ने “ऑपरेशन पोलो” रखा था I

 

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