कारगिल में भारत के खिलाफ परमाणु हथियारों का प्रयोग करने वाला था पाकिस्तान

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दिल्ली- 1999 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच चौथा युद्ध हुआ था I और इसमें भी हमेशा की ही तरह पाकिस्तान को भारत के हाथों बुरी तरह से पराजय का सामना करना पड़ा था लेकिन उस युद्ध के बारे में युद्ध समाप्ति के बाद एक से बढ़कर एक अनेकों खुलासे हुए है जो आज भी जारी है I

अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एक शीर्ष अधिकारी के एक पत्र ने इस बात का खुलासा किया है कि 1999 में जब भारत पाकिस्तान के बीच कारगिल में भीषण युद्ध छिड़ा हुआ था उस समय भारत के हाथों अपने सैनिकों की दुर्दशा को देखकर पाकिस्तानी सेना ने भारत के ऊपर परमाणु हमला करने के बारे में सोच लिया था इतना ही नहीं पाकिस्तान भारत के ऊपर परमाणु हमला करने की पूरी तैयारी भी कर रहा था I

सीआईए ने इस बात की जानकारी तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिलक्लिंटन को 4 जुलाई की सुबह ही दे दी थी I सीआईए के अधिकारी के मुताबिक सीआईए ने इस बात की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को उस वक्त दी थी जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से उनका मिलने कार्यक्रम था I

गौरतलब है कि उस समय के पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ के दुस्सासपूर्ण हरकत की वजह से पूरी दुनिया में शर्मसार हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति से भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे इस युद्ध को ख़त्म करवाने के लिए मदद मांगी थी I

व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् में उस वक्त रहे ब्रूस रीडेल ने बताया है कि 4 जुलाई के उस दिन इस बात की पूरी जानकारी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को दे दी थी और साथ ही उनसे यह अपील भी की थी कि वह सिर्फ नवाज शरीफ की बात को सुन ले बस I ब्रूस रीडेल उन कुछ अधिकारियों में शामिल थे जो उस दिन नवाज शरीफ और बिल क्लिंटन के बीच हुई मुलाकात के वक्त वहाँ पर मौजूद थे I

सीआईए के इस पूर्व अधिकारी ने इन सभी बातों का खुलासा बिल क्लिंटन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे सैंडी बर्जर के लिए लिखे गए एक श्रधांजलि नोट में लिखा है आपको बता दें कि गुरूवार को बर्जर का कैंसर से निधन हो गया था I

सीआईए ने अपने लिखे नोट में बिलक्लिंटन से कहा था कि वह शरीफ की बातों को सुन लें लेकिन दृढ बने रहे क्योंकि आज जिस संकट से पाकिस्तान जूझ रहा है उसे पाकिस्तान ने खुद ही खड़ा किया है और इसे समाप्त करने के लिए उसे अपने सैनिकों को पीछे हटने के लिए कहना होगा I इसके अलावा पाकिस्तान के पास और दूसरा कोई विकल्प मौजूद नहीं है I

रीडेल ने लिखा है कि बिलक्लिंटन का दबाव काम आया और शरीफ अपनी फौज को वापस बुलाने के लिए तैयार हो गए लेकिन उन्हें इसकी कीमत अपना पद गंवाकर चुकानी पड़ी I गौरतलब है कि उस समय के पाकिस्तानी सेना के जनरल ने तख्तापलट दिया था और जनरल परवेज मुशर्रफ ने खुद को पहले सैनिक तानाशाह बाद में राष्ट्रपति घोषित कर दिया था और शरीफ को अपना 1 साल का जीवन सऊदी अरब में बिताना पड़ा था I लेकिन इन सब के बावजूद एक सबसे बेहतरीन बात यह हुई थी कि दक्षिण एशिया से परमाणु युद्ध का संकट समाप्त हो गया था I

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