अभिभावकों के पैसे से बन रहे हैं स्कूल के बिल्डिंग

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मिर्ज़ापुर(ब्यूरो)- उद्योग व्यापार शून्य मिर्जापुर जिला अपने सूरतेहाल पर आंसू बहा रहा है। इस जिले में ना तो कोई उद्योग है ना कोई व्यापार जिसके अभाव में लोग मेहनत-मजदूरी अथवा छोटे-मोटे दुकान खोल कर अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं। इस जिले में लगभग 90% परिवार महीने का 3000 से लेकर ₹15000 कमाते हैं। जिससे वह अपने परिवार का पालन पोषण बच्चों की पढ़ाई आदि में खर्च करते हैं। इसी कमाई में अभिभावकों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगता है जब वो अगली कक्षा में अपने बच्चों के एडमिशन के लिए जाते हैं। तब शिक्षा के आड़ में लूटेरे बने यह शिक्षा माफिया अभिभावकों से 6000 से लेकर 10 हजार रुपए एडमिशन फीस 15 सो रुपए से लेकर ₹2000 तक मंथली फीस, 200रुपए कंप्यूटर फीस, 100 स्मार्ट क्लास फीस, 100 रुपए साइंस लैब फीस, ₹200 ऑप्शनल क्लास फीस, एवं स्कूल डेवलपमेंट के नाम पर खूब तगड़ी मोटी कमाई की जाती है। जिस से अभिभावकों में आक्रोश है।

रिपोर्ट- अंशू मिश्रा 

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