आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की स्मृति में आयोजित हुई परिचर्चा गोष्ठी

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बलिया ब्यूरो : आनंदनगर बलिया में अखिल भारतीय विकास संस्कृति एवं साहित्य परिषद के प्रधान कार्यालय पर कबीरम् समाज के तत्वावधान में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की 38वीं पुण्यतिथि पर परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित की गयी, जिसकी अध्यक्षता गोवर्धन भोजपुरी ने की। 

उक्त अवसर पर लालसाहब सत्यार्थी ने कहा कि हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी एक कुशल समीक्षक रहे है। उन्होंने ही कबीर जैसे फक्कड़ साधू संत को हिन्दी साहित्य के सिंहासन पर बिढ़ा दिया जो हम सभी के लिए प्रेरणास्पद है। सुदेश्वर अनाम ने कहा कि महापंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी की भोजपुरी मिश्रित हिन्दी की ही देन की आज भारत सरकार ने सरकारी कामकाज में हिन्दी को सेतु भाषा और जल्द ही राष्ट्र भाषा का दर्जा दिये जाने की आवश्यकता का महसूस किया है। यही नहीं आने वाले समय में देश के सभी गणमान्य जन सार्वजनिक मंच से हिन्दी में ही भाषण देंगे।

इसी क्रम में डा.फतेहचंद बेचैन ने कहा कि हिन्दी हिन्द की भाषा है, इसका हमें विकास चाहिए। तिमिर हर आलोकित कर दें। ऐसा हमें प्रकाश चाहिए जो आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के कृतित्व व व्यक्तित्व के संरक्षण से ही संभव है। सभी को उनसे प्रेरणा लेना चाहिए। गोवर्धन भोजपुरी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिन्दी में हो कामकाज सब, हिन्दी मेरी भाषा है। भारत के हर गली गांव में सबको यह अभिलाषा है। काव्यपाठ सुनाकर मूर्धन्य साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उक्त अवसर पर एमएम साहू, संजीव कुमार यादव, नवचंद तिवारी, दयाशंकर सिंह, डा.संतोष प्रसाद गुप्त आदि उपस्थित रहे।  

रिपोर्ट – संतोष कुमार शर्मा

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