कार्यकर्ताओं में भी असमंजस, जाने कब पार्टी बदल ले उनका नेता

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प्रतापगढ़ : प्रतापगढ़ विधानसभा चुनाव 2017 की रणभेरी का बिगुल बज चुका है, कल दिनांक 6: फरवरी 17 को नामांकन का जनपद प्रतापगढ़ का अंतिम दिन था ऐसे में प्रत्याशियों ने हुजूम के साथ अपना नामांकन किया | नामांकन करने वाले प्रत्याशियों में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, अपना दल के अलावा और पार्टियों के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है |

बता दें कि प्रतापगढ़ जनपद में सात विधान सभाएं हैं, प्रतापगढ़, विश्वनाथगंज, रानीगंज, पट्टी, रामपुर, लालगंज, बाबागंज और कुंडा इन विधानसभाओं में प्रतापगढ़ जनपद के कर्णधार एवं विभिन्न राजनैतिक दलों के मसीहा अपने चहेतों को जिताने के लिए पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में व्यस्त दिख रहे हैं | 2017 के चुनाव में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के लोग अपना-अपना राग अलाप रहे हैं, प्रतापगढ़ जनपद के कुछ राजनेताओं का राजनीतिक सफर प्रतापगढ़ जनपद में अस्त हो चुका है राजनैतिक सफर अस्त होने वाले तथाकथित नेता जो कल तक टिकट मिलने का जुगाड़ समस्त पार्टियों में लगा रहे थे कल नामांकन के अंतिम दिन उस सफर का अंत हो चुका है | उन लोगों में सर्वप्रथम बसपा के पूर्व विधायक संजय तिवारी बसपा के पूर्व विधायक बृजेश मिश्र समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक सांसद चंद्रनाथ सिंह अपना दल के पूर्व विधायक अब्दुल सलाम मुन्ना हाजी पूर्व मंत्री विधायक बृजेश शर्मा और विधायक लक्ष्मी नारायण गुरु जी पूर्व विधायक संगम लाल शुक्ला, नेता सुशील सिंह के अलावा पूर्व विधायक हरि प्रताप सिंह निर्दलीय सदर विधानसभा से किस्मत आजमा रहे हैं तो वही रानीगंज विधानसभा में बसपा के पूर्व विधायक राम सरोवर शुक्ला भी राष्ट्रीय लोक दल से अपनी किस्मत को आजमा रहे हैं इसके अलावा दर्जनों नेताओं ने टिकट के लिए कई जगह आवेदन किया था परंतु उनको किसी पार्टी से सफलता नहीं प्राप्त हुई रही बात विश्वनाथगंज विधानसभा के अपना दल के पूर्व प्रत्याशी एजाज अहमद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बिना धन के चुनाव लड़ना जीतना अब संभव नहीं है |

एक बार अपना दल दे मुझे विश्वनाथगंज से मौका दिया था तो जनता ने मेरा साथ नहीं दिया अब रही बात 17 के चुनाव में तो बिना नोट के अब इमानदार छवि का विधायक विधानसभा की नैया को नहीं पार कर सकता है, क्योंकि जब नेताओं का कोई चरित्र नहीं रह गया है तो आप कार्यकर्ता भी बड़े असमंजस में है नेता आज किसी दल में वोट मांग रहा है तो कल किस दल में रहेगा इसका कोई भरोसा नहीं रह गया है | आम जनता की आवाज यही आ रही है कि सत्ता के चुनाव के बाद यदि राजनैतिक पार्टियां अपने आप में सुधार नहीं करेगी तो आम जनमानस के अलावा मतदाता भी मजबूर होकर नोटा दबाने के लिए मजबूर होगा

रिपोर्ट – अवनीश कुमार मिश्रा 

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