डॉक्टर की लापरवाही से गयी लावारिस व्यक्ति की जान अस्पताल से निकलवाया था बाहर, नहीं निभाई जिम्मेदारी

कालाकांकर/प्रतापगढ (ब्यूरो) धरती का भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर ने ऐसी निर्दयिता दिखाई कि मानवता ही शर्म सार हो गयी, यही नहीं पूछने पर कहा कि वो पागल था, जैसे उस लावारिस का मेन्टल सर्टीफिकेट जेब में रखे हो | सरकार स्वास्थ सेवा को लेकर चाहे जितना सुविधा जनता के लिये करे लेकिन जनता को अपने हक के लिये लड़ाई लड़ कर ही उस योजना का लाभ मिल पाता है । जिसकी जितनी पकड़ उसको उतनी व्यवस्था, नहीं तो पैसा दो तो ईलाज होगा नहीं तो सीधा रेफर। क्या सामुदायिक स्वास्थ केन्द सिर्फ रिफर करने के लिये ही खोले जाते हैं । अगर आगे पीछे कोई नहीं है तो अस्पताल से बाहर निकाल देते हैं ।  कुन्डा के सरकारी अस्पताल में तो ऐसा ही होता है |

बता दें कि पिछले 6/7/17 मानिकपुर थानाक्षेत्र के अन्तरगत बड़ी बाग के पास नाले में एक व्यक्ति बेहोशी के हालत में दो दिन से पड़ा था | कुन्डा जाते समय सुबह नौ बजे अखंड भारत न्यूज के रिपोर्टर पंकज मौर्या की नजर उस पर पड़ी तो मानवता के नाते तुरन्त ही 108 नम्बर फोन करके एम्बूलेन्स बुलायी और मानिकपुर थाने सूचना दी | थानाध्यक्ष ने भी तुरंत ही पुलिस कर्मियो के साथ कुन्डा के सरकारी अस्पताल भेजवाया ताकि इलाज हो सके, वहां भर्ती करने के बाद रात में डाक्टरों ने उस बीमार व्यक्ति का इलाज न करके बाहर फिकवा दिया । रात भर में वो बीमार व्यक्ति ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया लेकिन पत्थर दिल डॉक्टर का कलेजा नहीं पसीजा |

दूसरे दिन सुबह एक लावारिस लाश को लोगो ने देखा तो कुन्डा पुलिस को जानकारी दी पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिये प्रतापगढ भेज दिया | उसकी मौत की खबर जब रिपोर्टर पंकज मौर्या को हुयी तो अस्पताल जाकर डॉक्टर से उस मरीज के बारे मे पूंछा तो बताने में आनाकानी करने लगे और अन्जान बने रहे, फिर बोले जाओ इमरजेंसी कक्ष में मरीज होगा जाके देख लो, जब बताया कि वो मर चुका है उसकी लाश भी पोस्टमार्टम को जा चुकी है तो बोले कि बाद में आना और बताने में आनाकानी करते रहे | फिर बोले कि तुम हो कौन तो रिपोर्टर ने अपना कार्ड दिखाया तो रजिस्टर मंगवाने के लिये किसी को भेजा और बोले रजिस्टर मे देख के बताता हूं । रजिस्टर आने के बाद देखकर बोले कि हां एक मरीज को मानिकपुर पुलिस लेके आई थी वो पागल था किसी गाड़ी ने टक्कर मार दिया था बेहोशी की हालत में था हमने उसको इलाहाबाद के लिये रिफर कर दिया था और थाने से होमगार्ड के आने से पहले वो अस्पताल से भाग गया था | जरा सोंचिये कि बेहोशी की हालत में कोई मरीज क्यों भागेगा | चलो अगर बेहोशी में वो भागा तो अस्पताल वाले क्या कर रहे थे, उसको बाहर से लाकर भी तो इलाज कर सकते थे, लेकिन जब खुद ही बाहर फेंका है तो इलाज क्यों करें ।

रिपोर्टर पंकज मौर्या ने उपजिलाधिकारी को लिखित शिकायाती पत्र देकर और दोषी के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है | जब एक पत्रकार बिना स्वार्थ के किसी अन्जान व्यक्ति की मदद कर सकता है, तो डाक्टर तो धरती के दूसरे भगवान भी कहे जाते है और सरकार से पैसा लेकर भी अपना काम क्यों नहीं करते, जबकी उनको तो अपने पास से कुछ भी नहीं देना होता दवा से लेकर सारे खर्च सरकारी होते है लेकिन वो अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हैं । अगर लोगों को नयी जिन्दगी देने वाला डॉक्टर ही मरीज को बोझ समझकर किनारे करते रहेंगें तो यह मानवता पर कलंक और ईन्सानियत की हत्या होगी |

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here