पत्रकारिता को मजाक बनाने वाले पत्रकार की तानाशाही दास्ताँ

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अंबेडकर नगर (ब्यूरो)- भारत का चौथा स्तंभ  पत्रकारिता जो आज गर्त में जाती हुई नजर आ रही है। गंदी मछली के नक्शे कदम पर आज की पत्रकारिता चल रही है, पत्रकारिता को बदनाम करने वाले चंद् खोटे सिक्कों ने पत्रकारिता जगत से जुड़कर चौथे स्तंभ को खोखला करने का काम कर रहे हैं, जिस तरह से दीमक लगता है और लकड़ी खोखला हो जाता है ठीक उसी प्रकार से पत्रकारिता की आड़ में चाटुकारिता और पक्षकारिता करने वाले लोगों की बाढ़ सी आ गई है|

मानो की दुनिया का सबसे ज्यादा सुखभोग का आनंद पत्रिकारिता में ही विद्यमान हो जबकि कहते हैं पत्रकारिता साफ सुथरी छवि और न्याय पूर्ण एवं समाज के हित में होना चाहिए | लेकिन आज ऐसा नहीं होता प्रतीत हो रहा है हालाँकि ठीक इसी का उल्टा नजारा देखने को मिल रहा है | जैसा कि अंबेडकर नगर जिले में अक्सर पत्रकारिता को लेकर कोई न कोई नई घटनाएं आती रहती हैं |

वर्तमान समय में चल रहे एक चैनल के पत्रकार राहुल पांडे जो कि नशे के अवैध कारोबारियों के भंडाफोड़ करने की सारी कारस्तानी और सामग्री को अपने कैमरे में कैद कर लिया था | जिस का विरोध नशे के अवैध कारोबारियों ने करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी| वही मामला जैसे-जैसे गर्म होता गया तूल पकड़ता गया तो पत्रकारिता जगत के बीच से ही कुछ पत्रकारों के द्वारा अवैध कारोबारियों को संरक्षण देने की महक आने लगी |

इतना ही नहीं सूत्र बताते हैं कि अवैध कारोबारियों का कुछ पत्रकारों से गहरा संबंध भी है जिनके संरक्षण में ये फल-फूल रहे थे वही संबंधित पत्रकार ने कवरेज करने गए राहुल पांडे को खरी खोटी सुनाते हुए दबाव बनाना चाहा मामले को समझौते के तौर पर खत्म करने की सलाह दिया इतना ही नहीं बात आगे बढ़ते बढ़ते  राहुल पांडे को धमकी भरे लहजे में अवैध नशे के कारोबारी के संबंधित पत्रकार ने बहुत कुछ कह डाला जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मामले को देखते हुए अगले कुछ दिनों में वायरल कर दी जाएगी जो खुद को बहुत प्रभावशाली पत्रकार मानता है।

जो जिले के उच्चाधिकारियों को ही नहीं बल्कि मंडल स्तर के उच्च अधिकारियों को अपना करीबी बता कर धौंस जमाता है ऐसे में पत्रकारिता के आड़ में अवैध नशे के कारोबारियों को संरक्षण देना और वही इन अवैध कारोबारियों की घिनौने कार्यो को उजागर करने वाला पत्रकार को जान से मारने की धमकी भी दी जाती है और पत्रकार बंधुओं के बीच से ही संरक्षण देने वाला पत्रकार  खुद को मंडल ब्यूरो बताता है और अंबेडकर नगर के जिला ब्यूरो सत्यम श्रीवास्तव और संवाददाता राहुल पांडे को प्रथम दृष्टया फर्जी बताकर FIR दर्ज करने की बात लिखित रूप से कहता है तो वहीं दूसरी तरफ यह साफ इनकार करता है कि इनका संबंध उस चैनल से नहीं है जिसका नाम राहुल पांडे बता रहा है किंतु अगले दिन वही मण्डल व्यूरो जो खुद को मंडल ब्यूरो और प्रभावशाली पत्रकार मानता है |

लिखित रुप से सोशल मीडिया पर पत्र वायरल वायरल करता है कि सत्यम श्रीवास्तव जिला ब्यूरो और राहुल पांडे तहसील संवाददाता है इतना ही नहीं मजे की बात तो यह है इनके चैनल के हेड इस मामले की जांच मंडल ब्यूरो को ही देते हैं जिसकी धौंस जमाते हुए उसने पांडे को सलाखों के पीछे भेजने की बात कहता है 24 घंटे में जांच कर कार्रवाई करने का फरमान यूपी हेड के द्वारा जारी होता है तो मण्डल ब्यूरो ने 24 घंटे तो दूर महज 4 घंटो के अंदर अपने घर बैठे बैठे ही सारी जांच प्रक्रिया पूरी कर यह निर्णय लेते हैं कि जिला ब्यूरो सत्यम श्रीवास्तव तहसील संवाददाता राहुल पांडे को अवैध वसूली व थानों में धौंस जमाने की बातो को सही मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से चैनल से बाहर कर दिया जाता है |

ऐसे में पत्रकारिता एक मजाक बनकर नहीं रह गई तो और क्या है आखिरकार कौन करेगा ऐसी पत्रकारिता जो स्वयं की सुरक्षा ना कर सके और इतना ही नहीं वह चैनल और अखबार जो अपने पत्रकारों की सुरक्षा ना कर सके उसे फंसता देख बीच मजधार में यह कह दे कि इस व्यक्ति से मेरा कोई लेना-देना नहीं और इसे प्रभावी तौर पर बाहर कर दिया जाता है वही इसका लाभ पुलिस प्रशासन उठाने में नही चूकती और अपने कार्यवाही को अंजाम देते हुए अपने अरमानों को पूरा करती है वहीं दूसरी तरफ तथाकथित पत्रकारों और अवैध नशे कारोबारियों का मनोबल और भी ऊंचा हो जाता है |

इसलिए आज की पत्रकारिता सिर्फ़ पक्षकारिता और चाटुकारिता बनकर रह गई है जहां पत्रकारों में आपसी सहमति और विचारधाराएं ना मेल खाती हों।सीनियर पत्रकारों का सम्मान करना न जानते हों ऐसे लोग पत्रकारिता को बदनाम नहीं कर रहे हैं तो और क्या कर रहे हैं। आपसी संगठन की मजबूती ना हो तो ऐसे में पत्रकारिता अपने अस्तित्व से वास्तविक रूप से मिटती हुई प्रतीत आएगी और एक पत्रकार दूसरे पत्रकार पर कीचड़ उछालता हुआ हर रोज हर पल नजर आएगा जिससे पत्रकारिता की गरमा गिरती हुई नजर आएगी और चौथा अस्तम्भ एक दिन ध्वस्त हो जाएगा।ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा कहां है। ऐसी पत्रकारिता से क्या मतलब है।

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