आस्था और विश्वास है लोगों में, अमवा की सती माई पर

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ग़ाज़ीपुर (ब्यूरो) जनपद् के अमवा की सती माई का स्थान लोगों की आस्था व विश्वास का केंद्र बना हुआ है | अमवा सती माई का स्थान ग़ाज़ीपुर जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर पूरब मुहम्मदाबाद करीमुद्दीनपुर -चितबड़ागांव मार्ग पर परसा मोड़ से बाराचवर -तिराहीपुर मार्ग पर सिउरि अमहट बाजार केपास थोड़ी दूर पश्चिम और रसडा स्टेशन से बारह किलोमीटर दूर बलिया-गाजीपुर सीमा पर स्थित है | अमवां गांव की सतीमाई सर्प के जहर का नाश करने वाली मानी जाती हैं। अमवा में स्थित सती माई का दरबार इस वैज्ञानिक युग में झुठलाने वाला है। सर्पदंश से मुक्ति पाने के लिए इस स्थान पर न केवल पास-प़डोस के जनपदों से बल्कि अन्य प्रदेशों से पी़डित आते हैं और मुस्कुराते हुए जाते हैं।

यहां आने वाले श्रद्घालुओं, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय दुकानदारों की मानें, तो यहां पर कई सर्पदंश पी़डितों को जीवन-दान मिल चुका है। देश के अन्य देवी मंदिरों की भांति यहां पर भी चैत्र और आश्र्विन (क्वार) की नवरात्रि, सावन महीने तथा नागपंचमी को श्रद्घालुओं का पूजा-पाठ के लिए तांता लगा रहता है।

सती माई को लेकर इलाके में एक किंवदंती प्रचलित है, जिसे बड़े-बुजु़र्गों के मुख से आज भी सुना जाता है, जिसके अनुसार अमवां सिंह गांव के परमल सिंह की शादी बलिया जनपद के दौलतपुर गांव में हुई थी। विदाई कराकर अपनी पत्नी को लेकर वह गांव चले आये। अभी सुहागरात भी नहीं हुई थी। वह अपने खेत की तरफ घूमने गये तो रास्ते में ही उन्हें सांप ने डस लिया। फलस्वरूप परमल सिंह की मौत हो गयी। यह खबर उनकी पत्नी को मिली तो वह रोती-बिलखती शव के पास गयी और दहाड़ें मार कर गिर पड़ी और शरीर का त्याग कर दिया। उस वक्त सती का पता नहीं चल सका। अब वह स्थान अमवां की सतीमाई के नाम से चर्चित हो गया।

बुजु़र्गों ने बताया कि काफी दिन बीतने के बाद एक चरवाहा गाय चरा रहा था। उसी दौरान उसे सर्प ने डस लिया। वह अपने घर की ओर भागा जा रहा था, किंतु जैसे ही सती माई का स्थान आया तो वह वहीं मूर्छित होकर गिर पड़ा। यहां गिरने के कुछ समय बाद सर्प का जहर खत्म हो गया और जीवित होकर भला-चंगा हो गया। कहते हैं कि उसके लौटने के बाद यह चर्चा चारों तरफ फैल गयी और सर्पदंश से पी़डित यहां आकर सर्पदंश के जहर से मुक्ति पाने लगे।

मंदिर के पुजारी अंजनी सिंह सर्पदंश के जहर से मुक्ति पा चुके तमाम लोगों के साक्षात गवाह हैं। यहां प्रत्येक सोमवार और शुावार को भक्तों का हुजूम अपनी मन्नतें पूरी होने पर पूजापाठ करता है।नवरात्रि में काफी दूर दराज कई जिलों, प्रदेशों से भारी भीड़ श्रद्धालुओं की उमड़ती है |

रिपोर्ट – बृजा नन्द तिवारी

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