कई बार लोग मुझे सड़क से उठाकर घर ले गये मेरा रेप किया और वापस सड़क पर छोड़ दिया…

0
1843

शैख़ जब मै 5 साल का था एक चाय की दुकान पर काम करता था लेकिन एक  दिन मेरे हाथों से एक कप से भरी ट्रे छुटकर गिर गयी मै डर कर वहां से भाग  गया, क्योंकि मै अपने माँ-बाप के पास घर नही जा सकता था अगर जाता तो  वो मुझे पिटते और गलियाँ देते इसलिए मैं मलाड स्टेशन पर रुक गया 8  साल की उम्र तक जूते पोलिश करके , कचरे में पड़ा खाना खाकर और ट्रेन में  गाना गाकर वही रहा |

एक दिन सिस्टर सेराफिना मेरे पास आयी और बोली “मेरे साथ स्नेह सदन  चलो हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे” लेकिन मै डरा हुआ था क्योंकि पहले भी  लोग मुझे अपने घर ले गये थे जहाँ उन्होंने मेरा रेप किया, पर फिर जब वो  लगातार कोशिश करती रहीं तो अंत में मै मान गया और इसके बाद मेरा  जीवन पूरी तरह से परिवर्तित हो गया, अगले 10 सालों तक मै वहां उनके  और फादर placie के संरक्षण में रहा जिन्होंने मुझे मिस्टर Eustace के यहाँ  ड्राईवर की नौकरी दिलवाई |

वहां मैंने 13 साल तक काम किया, मिस्टर Eustace से ही मैंने अच्छी  अंग्रेजी बोलना सीखा और ये बात भी समझी की जीवन में अपनी खुद की पहचान बनाना कितना ज़रूरी है, हर साल क्रिसमस पर वो मुझे कुछ गिफ्ट देते थे मेरे चौथे साल में जब उन्होंने मुझसे पुछा मै क्या गिफ्ट चाहता हूँ …. मैंने कहा बार्सिलोना का एक ट्रिप | मैंने उनसे कहा “यहाँ पर लोग हमेशा मुझे एक स्ट्रीट चाइल्ड की तरह देखेंगे लेकिन मै इस दुनिया को घूमने और समझने का एक मौका चाहता हूँ” और उनहोंने मुझे वो दिया |

बॉम्बे मेरा सबसे गहरा प्यार है और क्या आप जानते जब आसमान पर उड़ते वक़्त मैंने अपने दिल (बॉम्बे ) को देखा तो मैंने कैसा महसूस किया ?

मै दोगुनी उर्जा के साथ वापस आया और मिस्टर Eustace की मदद से स्नेहा ट्रेवल्स की शुरुवात की ताकि लोगों को मेरे नजरिये से मेरा बॉम्बे दिखा सकूँ , इस तरह मैंने देश – विदेश में बहुत सारे दोस्त बनाये उनमे से एक ने मुझे मेरी खुद की कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया…. तो मै जिसने कभी पढने के लिए भी किताब नही उठाई थी ने लिखना शुरू कर दिया मेरे पड़ोसियों ने उसमें व्याकरण सही की और एक स्पैनिश दोस्त ने मेरी किताब ‘बॉम्बे/मुंबई लाइफ इज़ लाइफ’ पब्लिश कर दी | मै जब 5 साल का था तब भी भाग रहा था और आज 25 साल का हूँ आज भी भाग रहा हूँ दोनों में अंतर सिर्फ इतना है तब मै डर कर भाग रहा था और आज आत्मविश्वास के साथ अपने जैसे औरों की मदद करने के लिए भाग रहा हूँ |

 

VIA – Human Of Bombay

NO COMMENTS