ललचाने लगी लीची की लाली, आम के लिए तरसेंगे लोग

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समस्तीपुर (ब्यूरो)- लीची की लाली अब जिले के लोगों को ललचाने लगी है | वहीं आम के स्वाद के लिए इस बार आमलोग को तरसना पड़ सकता है | हालांकि पिछले दिनों आयी आंधी व बारिश से लीची की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है|

खास तौर पर आम की फसल को आंधी पानी से काफी क्षति हुई है | यदि आगे मौसम ठीक-ठाक रहा तो लगभग 15 दिनों के बाद लीची काफी मात्रा में बाजार में बिकने लगेगी| जिले के पूसा स्थित डॉ.राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि के उद्यान वैज्ञानिक डॉ.अनिल कुमार सिंह का बताना है कि लीची लगभग 20 मई के बाद पूरी तरह खाने लायक हो जायेगा|

उन्होंने लीची के बचाव के लिए वर्षा नहीं होने की स्थिति में अविलंब सिंचाई करने की अपील की, साथ ही लीची के पकने के समय कीड़े से बचाव के लिए एक मिली ईमेडाक्लोरोपिड दवा 5 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी| कहा कि यह पेड़ो में लगे फल को कई तरह की बीमारियों से बचाव करता है| इधर, इस वर्ष परंपरागत आम के पेड़ों में फल नगन्य दिख रहा है|

जिसके कारण लोगों को इस बार आयातित आम के फलों पर निर्भर रहना होगा| यहां यह बता दे कि समस्तीपुर जिलें में आम की फसन अच्छी होने के बाद किसानों की अर्थिक स्थिति भी काफी सुदृढ़ हो जाया करती है| आंधी और तुफान से नुकसान को लेकर किसान काफी चिंतित भी नजर आ रहे है|

किसानों का बताना है कि आम की फसल बर्बाद होने के कारण इस वर्ष इसका फल काफी महंगा होगा| हालांकि कुछ हाईब्रीड आम के प्रभेदों का फलन सामान्य है| वहीं कुछ क्षेत्रों में 25 से 30 प्रतिशत फलन की सूचना मिल रही है| जो थोडी बहुम महंगाई पर अंकुश लगा सकता है|

रिपोर्ट-रंजीत कुमार 

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