सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीज़ों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना

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जालौन। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सर्जन व नेत्र विशेषज्ञ न होने से नेत्र रोगियों और सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। तो वहीं, दिसंबर माह से कुत्ते व बंदर काटने की वैक्सीन न होने से मरीजों को मजबूरी में बाजार में मंहगे दामों पर खरीदकर वैक्सीन लगवानी पड़ रही है।

स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टरों के 7 पद स्वीक्रत हैं जिनमें एक पद लेडीज डाॅक्टर का स्वीक्रत है। उक्त पदों के सापेक्ष अस्पताल में इस समय 4 पुरूष व 1 महिला डाॅक्टर डाॅक्टर तैनात है। जबकि सर्जन तथा नेत्र विशेषज्ञ का पद इस समय खाली चल रहा है। उक्त पदों पर कोई डाॅक्टर न होने से नेत्र रोगियों तथा शल्य चिकित्सा कराने के लिए आने वाले रोगियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में उन्हें या तो जिला अस्पताल जाना पड़ता है अथवा मजबूरी में प्राइवेट डाॅक्टरों को मंहगी फीस देकर इलाज कराना पड़ता है। इस समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी में 400 से 500 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। इस समय मौसम को देखते हुए इनमें देखते हुए सर्वाधिक खांसी, जुकाम, सर्दी व वायलर से पीड़ित मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा डायबिटीज, हाइपरटेंशन, ब्लड प्रेशर, नेत्र रोग और शल्य चिकित्सा के लिए आने वाले मरीज भी हैं। परंतु अस्पताल में डायबिटीज व हाइपरटेंशन के इलाज की सुविधा नहीं है, जिसके चलते इन बीमारियों से पीड़ित मरीज आने पर उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। डायबिटीज से पीड़ित ग्राम कुंवारपुरा निवासी मनोज कुमार बताते हैं कि उन्हें शुगर की शिकायत है, लेकिन अस्पताल में शुगर की कोई दवा उपलब्ध नहीं है। डाॅक्टरों ने उन्हें उरई जिला अस्पताल जाने की सलाह दी है। तो वहीं, नेत्र विशेषज्ञ व शल्य चिकित्सक न होने से इन मरीजों को उल्टे पैर वापस लौटना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल में प्रतिदिन दो से तीन मरीज कुत्ता काटने अथवा बंदर काटने वाले आते हैं। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिसंबर माह से एंटी रेबीज वेक्सीन नहीं आई है। इसलिए इन मरीजों को मजबूरी में बाहर से मंहगे दामों पर एंेटी रेबीज इंजेक्शन खरीदकर लगवाने पड़ते हैं। अनिल शिवहरे, विपुल दीक्षित, विष्णु अग्रवाल, वैभव अग्रवाल आदि ने सीएमओ मांग की है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऐंटी रेबीज बेक्सीन उपलब्ध कराई जाए ताकि कुत्ता से काटे हुए मरीजों को वेक्सीन लगाई जा सके।

इसके अलावा अस्पताल में लैब टेक्नीशियन, एक्स रे टेक्नीशियन एवं तीन फाॅर्मासिस्ट व एक आयुष चिकित्सक के पदों पर तैनाती है। तो वहीं, नर्स के 24 पदों के सापेक्ष मात्र एक नर्स पोस्टेड है और 6 नर्सों को संविदा पर रखकर काम चलाया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी डाॅ. मुकेश राजपूत बताते हैं कि सर्जन एवं नेत्र विशेषज्ञ के खाली पदों के लिए कई बार शासन को लिखा जा चुका है। ऐंटी रेबीज वेक्सीन की भी बराबर मांग की जा रही है। परंतु ऊपर से ही वेक्सीन नहीं आ रही है। इसी प्रकार अस्पताल में डायबिटीज व हाइपरटेंशन के इलाज की सुविधा नहीं है। इसीलिए उक्त रोगों की दवाऐं अस्पताल में नहीं आती हैं। यह सुविधाऐं जिला अस्पताल में उपलब्ध हैं। इसीलिए उक्त रोगों से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है।

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव

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