अस्पताल में मरीजों को दवा के नाम पर मिल रही दुआ

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मैनपुरी : सर्दी की विदाई और गर्मी की शुरूआत होते ही विभिन्न तरह की बीमारियां फैलने लगी हैं। जिसके कारण जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमडने लगी है मगर जिला अस्पताल में दवा के नाम पर मरीजों को सिर्फ दुआ बांटी जा रही है। अस्पताल में दवाईयां न होने से मरीज तो परेशान है ही ऊपर से डाक्टर भी सोच रहे है कि आखिर मरीज के पर्चें पर क्या लिखा जाये।

जिला अस्पताल सोमवार की सुबह जैसे की खुला मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी कोई बुखार तो कोई खांसी और पेट दर्द से परेशान दिखाई दे रहा था। अपने- अपने कमरों में बैठे डाक्टर मरीजों को देख तो रहे थे। मगर वो मरीजों के पर्चे पर सैप्ट्रान, सीपीएम, पीसीएम ही लिख पा रहे थे। क्योकि वर्तमान में अस्पताल के अन्दर कोई भी जीवन रक्षक दवाई उपलब्ध नहीं है। यहां तक की कुत्ता काटने तक का रैबीज भी महीनों से नहीं है। रूम के बाहर एक कागज पर लिखकर टांग दिया गया है, कि कुत्ता काटे के इंजेक्शन खत्म हो गये हैं । जिला अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि वह दवा वितरण कक्ष में बैठता जरूर है लेकिन मन नहीं लगता है। मरीज को आखिर दिया जाये तो क्या दिया जाये ? अस्पताल में दवा न होने से मरीज अपना दम तोड़ रहे हैं। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम ललूपुर निवासी 30 वर्षीय राजू वर्मा पुत्र सीताराम को एक सप्ताह पूर्व बुखार आया था। परिवार के लोगों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां अच्छा इलाज न मिलने के कारण परिजन उसे आगरा ले गये। जहां निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गयी। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाईयां न होने से दर्जनों मरीजों को रोजाना आगरा और सैफई रैफर किया जा रहा है। ऐसे मरीजों को जिला अस्पताल में ही ठीक किया जा सकता है। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ तो उमड रही है मगर वे दवा के नाम पर सिर्फ दुआ लेकर वापस लौटने को मजबूर है।

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एन. के. उपाध्याय का कहना है कि अस्पताल में जीवन रक्षक दवाईयां नहीं है। शासन को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है। अतिशीघ्र दवाईयां उपलब्ध हो जायेगी। अस्पताल में जो दवाईयां है मरीजों को बांटी जा रही है।

रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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