डीपीआरओ की दखलंदाजी के बाद मिली शौचालय बनाने की अनुमति

0
64


फतेहपुर चौरासी/उन्नाव (ब्यूरो) विकासखंड के ग्राम रुस्तमपुर में घरों के बाहर शौचालय निर्माण पर वन विभाग की रोक लगाए जाने के मामले में बुधवार को डीपीआरओ मौके पर पहुंचे, उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत की उसके बाद विभाग के अधिकारियों ने घर के पीछे शौचालय निर्माण कराए जाने की अनुमति देकर ग्रामीणों को राहत दी ।

आगे बताते चलें रुस्तमपुर गांव करीब 200 वर्ष पुराना है। गांव में परी परिषदीय प्राथमिक विद्यालय,सीसी रोड, आवास के साथ भारत स्वच्छता मिशन के तहत शौचालय भी बनाए गए हैं। राजस्व गांव के साथ या ग्राम पंचायत भी है एवं ओडीएफ से जुड़ा है।शासन के आदेश पर अवैध कब्जों को मुक्त कराने की पहल का दुरुपयोग करते हुए वन विभाग ने पूरे गांव पर अपना आधिपत्य बताकर बिना सूचना के न केवल घरों को गिराना शुरू कर दिया है बल्कि ग्रामीणों से मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर लाखों रुपए जुर्माना भी वसूल चुके हैं ।यही नहीं बन विभाग ने यहां पर पांच शौचालयों का निर्माण अपनी जमीन पर कराए जाने की बात कहते हुए इसे रुकवा दिया था ग्रामीणों के मुताबिक गांव के अधिकांश भाग पर वन विभाग अपना अधिकार बता रहा है मंगलवार को प्रभारी जिला पंचायतराज अधिकारी राजेश चौरसिया गांव पहुंचे और शौचालय निर्माण के स्थान की जांच की उन्होंने बताया कि गांव में 12 सौचालयो का निर्माण होना है। इसमें पांच शौचालय जहां बन रहे हैं।उस जमीन को वन विभाग अपनी बता रहा है। हालांकि बाद में वन विभाग के अधिकारियों से इस मामले में बातचीत हुई तो उन्होंने आगे के स्थान पर पीछे शौचालय निर्माण कराए जाने की अनुमति दे दी है।

ग्राम प्रधान अनिल कुमार दीक्षित व बसंत दीक्षित आदि ग्रामीणों ने बताया कि विभाग के अधिकारी गांव की पूरी अनुसूचित आबादी करीब 25 घर और सामान्य वर्ग की आबादी में 8 बिस्वा भूमि को छोड़ कर लगभग 40 घर वन क्षेत्र के दायरे में आने का दावा कर रहे हैं।उनके मुताबिक केवल कछियाना ही वन क्षेत्र से बाहर है ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव वन विभाग की भूमि पर बसा था तो राजस्व विभाग को पहले जानकारी दी जानी चाहिए थी साथ ही लोगों को चेतावनी दी जाती लेकिन आज तक कोई जांच पड़ताल नहीं की गई बताया कि वर्ष 2007 और 8 में यह गांव अंबेडकर भी रहा है गांव में कच्चे पक्के मिलाकर 137 घर हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्ष 1998 -99 और 2003 में गंगा में आई भीषण बाढ़ में वन विभाग की जमीन कट गई थी।

रिपोर्ट – रघुनाथ प्रसाद

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY