निजी वाहनों का हो रहा व्यावसायिक उपयोग, पर नहीं हो रही कोई कार्यवाही

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महराजगंज /रायबरेली- निजी वाहनों के व्यवसायिक उपयोग पर रोक के बाद भी जिले के शासकीय विभागों के अधिकारी इसमें सवारी करते मिलेंगे तथा क्षेत्र के कई वाहन स्वामियों ने तो अपने निजी वाहन को सिर्फ इसी उदेश्य से खरीदा है कि वह इससे कुछ कमाई कर सकें । वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की बात की जाय तो ज्यादातर निजी वाहन स्वामी का अपने वाहन के प्रति व्यवसायिक उपयोग ही एकमात्र उदेश्य रहता है । वहीं निजी वाहन खचाखच सवारियां भरकर सहालग मे फर्राटा भरते नजर आयेंगे जबकि ऐसा करने वालो पर आर्थिक जुर्माने के साथ ही जेल का भी  प्रावधान किया गया है । जिले भर के इन वाहन स्वामियों द्बारा वन टाइम टैक्स जमा किया गया है । लेकिन जिले भर मे इन  वाहनों पर  टैक्स की चोरी उन अधिकारियों के संरक्षण मे हो रही है जिनपर इस नियम को लागू कराने की जिम्मेदारी है । प्राइवेट वाहनों के कामर्शियल उपयोग से सरकार को दोहरा नुकसान हो रहा है । कामर्शियल रजिस्ट्रेशन से मिलने वाले तिमाही टैक्स के साथ इनकम टैक्स की भी चोरी हो रही है ।

क्या हैं नियम ?
वाहन कामर्शियल या निजी उपयोग के लिये खरीदा जा रहा है यह तय करने के बाद ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है । वाहन निजी उपयोग के लिये प्राइवेट रजिस्ट्रेशन कराना होता है । इसके वन टाइम टैक्स की सुविधा है । यदि व्यवसायिक उपयोग है तो हर तिमाही टैक्स जमा करना होता है जोकि सीटों की संख्या पर निर्भर करता है ।

ये है प्रावधान
मोटर वाहन एक्ट 1986 के अनुसार प्राइवेट रजिस्ट्रेशन वाले वाहन के लिये कामर्शियल उपयोग पर प्रतिबंध है । ऐसा करने वालो के खिलाफ कानूनी कार्यवाही के साथ आर्थिक दण्ड भी लगाया जा सकता है । मोटर वाहन एक्ट 1986 की धारा 192 के अनुसार पहली गलती पर 5000 रुपये जुर्माना व 3 महीने का कारावास व दूसरी गलती पर 10 हजार रुपये जुर्माना व एक वर्ष के कारावास की सजा या वाहन जब्त करने का प्रावधान है ।

रिपोर्ट – विनय सिंह

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