बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़

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जालौन(ब्यूरो)-
प्रशासन व शिक्षा विभाग द्वारा भले ही नकल विहीन बोर्ड परीक्षाओं का दावा किया जा रहा हो पर यह दावे सिर्फ हवा-हवाई ही साबित हो रहे हैं। हकीकत यह है कि बोर्ड परीक्षाओं के अच्छे परिणाम दिखाने के लिए प्राईवेट स्कूलों के प्रबंधकतंत्र द्वारा अपने छात्र-छात्राओं को नकल कराने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। ऐसे शिक्षा माफिया उन स्कूलों के प्रबंधतंत्र से भी जुगाड़ लगा रहे हैं जहां पर उनके विद्यालयों के छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। अधिकांश छोटे-छोटे प्राईवेट स्कूलों द्वारा जिस तरह से शिक्षा का व्यवसायीकरण किया गया है उससे पढ़ाई की जगह केवल अच्छे रिजल्ट को तरजीह दी जा रही है। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़ा। इससे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड हो रहा है।

इन दिनों बोर्ड परीक्षाएं संपन्न हो रही हैं। शिक्षा विभाग व प्रशासन नकल विहीन परीक्षाएं संपन्न कराए जाने के दावे कर रहा है और जिले में कहीं भी बड़े पैमाने पर नकल नहीं होना दिखाया जा रहा है। जबकि हकीकत इससे उलट है। जिले में बड़ी संख्या में नकलचियों के पकड़े जाने का सिलसिला भी जारी है। हालांकि अभी तक कहीं पर सामूहिक नकल नहीं पकडी गई है पर सूत्रों की मानें तो जितनी संख्या में नकलची पकड़े जा रहे हैं वह केवल दिखावा भर हैं। हकीकत यह है कि अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर बडे पैमाने पर नकल कराई जा रही है। कई प्राईवेट विद्यालयों के संचालक अपने विद्यालय का अच्छा रिजल्ट निकालने के लिए उन स्कूलों के संचालक से संपर्क कर रहे हैं जहां पर उनके छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षा केंद्रों के प्रबंध तंत्र से जुगाड़ लगाने का सिलसिला जारी है। कई लोग इसमें सफल हो गए हैं तो कई अभी भी प्रयासरत हैं।

प्राइवेट विद्यालयों के संचालकों का केवल यही उद्देश्य है कि उनके विद्यालय के छात्र-छात्राओं को जमकर नकल कराई जाए ताकि उनके विद्यालय का परीक्षा परिणाम अच्छा आ सके। इससे उन्हें नए शिक्षण सत्र में अधिक से अधिक संख्या में छात्र-छात्राओं को प्रवेश लेने के लिए लुभाने में मदद मिल सके। कुल मिलाकर यह शिक्षा माफिया बच्चों की पढ़ाई की जगह केवल रिजल्ट पर ध्यान दे रहे हैं जबकि पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही है। ऐसे विघालयों द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है जिस पर शिक्षा विभाग व प्रशासन अंकुश लगा पाने में सफल नहीं हो पा रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में अधिकारी इस गोरखधंधे पर चाबुक चलाते हैं या फिर वह भी इससे अनजान बनकर छात्रों के भविष्य के खिलवाड़ में शामिल होते हैं?

पूरी तैयारी के साथ कराई जाती है नकल-

जिन परीक्षा केंद्रों पर नकल कराई जा रही है वहां पर इसके लिए पूरी तैयारी की गई है। परीक्षा केंद्र के प्रबंध तंत्र द्वारा कुछ गुर्गों को परीक्षा केंद्र के आसपास तैनात कर दिया जाता है। सचल दल या किसी अधिकारी की गाड़ी परीक्षा केंद्र की ओर आते हुए देखकर यह गुर्गे परीक्षा केंद्र पर सूचना दे देते हैं और चंद मिनटों में ही परीक्षार्थियों से नकल की पर्चियां छुड़ा ली जाती हैं। सचल दल व अधिकारियों के जाते ही फिर से नकल शुरू हो जाती है? ऐसे में प्रशासन व शिक्षा विभाग की रणनीति नकल माफियाओं के आगे बौनी साबित हो रही है। मांग यह उठ रही है कि शिक्षा विभाग नई रणनीति के तहत नकल रोकने का काम करे।

रिपोर्ट- अनुराग श्रीवास्तव
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