उरी के 18 जवानों की शहादत ने पूरे देश को एकजुट कर दिया है, उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी : पीएम मोदी

0
387

modi
मन बात बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा बीते दिनों जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में, एक आतंकी हमले में, हमारे देश के 18 वीर सपूतों को हमने खो दिया। मैं इन सभी बहादुर सैनिकों को नमन करता हूँ और उन्हें श्रद्धांजलि देता हूँ। इस कायराना घटना पूरे देश को झकझोरने के लिए काफ़ी थी। देश में शोक भी है, आक्रोश भी है और ये क्षति सिर्फ़ उन परिवारों की नहीं है, जिन्होंने अपना बेटा खोया, भाई खोया, पति खोया। ये क्षति पूरे राष्ट्र की है। और इसलिए मैं देशवासियों को आज इतना ही कहूँगा और जो मैंने उसी दिन कहा था, मैं आज उसको फिर से दोहराना चाहता हूँ कि दोषी सज़ा पा करके ही रहेंगे।

मेरे प्यारे देशवासियो, हमें हमारी सेना पर भरोसा है। वे अपने पराक्रम से ऐसी हर साज़िश को नाकाम करेंगे और देश के सवा-सौ करोड़ देशवासी सुख-चैन की ज़िंदगी जी सकें, इसके लिए वो पराक्रम की पराकाष्ठा करने वाले लोग हैं। हमारी सेना पर हमें नाज़ है। हम नागरिकों के लिए, राजनेताओं के लिए, बोलने के कई अवसर होते हैं। हम बोलते भी हैं। लेकिन सेना बोलती नहीं है। सेना पराक्रम करती है।

मैं आज कश्मीर के नागरिकों से भी विशेष रूप से बात करना चाहता हूँ। कश्मीर के नागरिक देश-विरोधी ताक़तों को भली-भाँति समझने लगे हैं। और जैसे-जैसे सच्चाई समझने लगे हैं, वे ऐसे तत्वों से अपने-आप को अलग करके शांति के मार्ग पर चल पड़े हैं। हर माँ-बाप की इच्छा है कि जल्द से जल्द स्कूल-कॉलेज पूरी तरह काम करें। किसानों को भी लग रहा है कि उनकी जो फ़सल, फल वगैरह तैयार हुए हैं, वो हिन्दुस्तान भर के market में पहुँचें। आर्थिक कारोबार भी ठीक ढंग से चले। और पिछले कुछ दिनों से कारोबार सुचारु रूप से चलना शुरू भी हुआ है। हम सब जानते हैं – शान्ति, एकता और सद्भावना ही हमारी समस्याओं का समाधान का रास्ता भी है, हमारी प्रगति का रास्ता भी है, हमारे विकास का भी रास्ता है। हमारी भावी पीढ़ियों के लिये हमने विकास की नई ऊंचाइयों को पार करना है। मुझे विश्वास है कि हर समस्या का समाधान हम मिल-बैठ करके खोजेंगे, रास्ते निकालेंगे और साथ-साथ कश्मीर की भावी पीढ़ी के लिये उत्तम मार्ग भी प्रशस्त करेंगे। कश्मीर के नागरिकों की सुरक्षा, ये शासन की जिम्मेवारी होती है। क़ानून और व्यवस्था बनाने के लिये शासन को कुछ क़दम उठाने पड़ते हैं। मैं सुरक्षा बलों को भी कहूँगा कि हमारे पास जो सामर्थ्य है, शक्ति है, क़ानून हैं, नियम हैं; उनका उपयोग क़ानून और व्यवस्था के लिये है, कश्मीर के सामान्य नागरिकों को सुख-चैन की ज़िन्दगी देने के लिये है और उसका हम भली-भाँति पालन करेंगे। कभी-कभार हम जो सोचते हैं, उससे अलग सोचने वाले भी लोग नये-नये विचार रखते हैं। social media में इन दिनों मुझे बहुत-कुछ जानने का अवसर मिलता है; हिन्दुस्तान के हर कोने से, हर प्रकार के लोगों के भावों को, जानने-समझने का अवसर मिलता है और ये लोकतंत्र की ताक़त को बढ़ावा देता है। पिछले दिनों 11वीं कक्षा के हर्षवर्द्धन नाम के एक नौजवान ने मेरे सामने एक अलग प्रकार का विचार रखा। उसने लिखा है – “उरी आतंकवादी हमले के बाद मैं बहुत विचलित था। कुछ कर गुज़रने की तीव्र लालसा थी। लेकिन करने का कुछ रास्ता नहीं सूझ रहा था। और मुझ जैसा एक छोटा-सा विद्यार्थी क्या कर सकता है। तो मेरे मन में आया कि मैं भी देश-हित के लिए काम कैसे आऊँ। और मैंने संकल्प किया कि मैं रोज़ 3 घंटे अधिक पढ़ाई करूँगा। देश के काम आ सकूँ, ऐसा योग्य नागरिक बनूँगा। ”

भाई हर्षवर्द्धन, आक्रोश के इस माहौल में इतनी छोटी उम्र में, आप स्वस्थता से सोच सकते हो, यही मेरे लिए ख़ुशी की बात है। लेकिन हर्षवर्द्धन, मैं ये भी कहूँगा कि देश के नागरिकों के मन में जो आक्रोश है, उसका एक बहुत-बड़ा मूल्य है। ये राष्ट्र की चेतना का प्रतीक है। ये आक्रोश भी कुछ कर गुज़रने के इरादों वाला है। हाँ, आपने एक constructive approach से उसको प्रस्तुत किया। लेकिन आपको पता होगा, जब 1965 की लड़ाई हुई, लाल बहादुर शास्त्री जी हमारा नेतृत्व कर रहे थे और पूरे देश में ऐसा ही एक जज़्बा था, आक्रोश था, देशभक्ति का ज्वार था, हर कोई, कुछ-न-कुछ हो, ऐसा चाहता था, कुछ-न-कुछ करने का इरादा रखता था। तब लाल बहादुर शास्त्री जी ने बहुत ही उत्तम तरीक़े से देश के इस भाव-विश्व को स्पर्श करने का बड़ा ही प्रयास किया था। और उन्होंने ‘जय जवान – जय किसान’ मंत्र देकर के देश के सामान्य मानव को देश के लिए कार्य कैसे करना है, उसकी प्रेरणा दी थी। बम-बन्दूक की आवाज़ के बीच देशभक्ति को प्रकट करने का और भी एक रास्ता हर नागरिक के लिये होता है, ये लालबहादुर शास्त्री जी ने प्रस्तुत किया था। महात्मा गाँधी भी, जब आज़ादी का आन्दोलन चलाते थे, आन्दोलन जब तीव्रता पर होता था और आन्दोलन में एक पड़ाव की ज़रूरत होती थी, तो वे आन्दोलन की उस तीव्रता को समाज के अन्दर रचनात्मक कामों की ओर प्रेरित करने के लिए बड़े सफल प्रयोग करते थे। हम सब – सेना अपनी ज़िम्मेवारी निभाए, शासन बैठे हुए लोग अपना कर्तव्य निभाएँ और हम देशवासी, हर नागरिक, इस देशभक्ति के जज़्बे के साथ, हम भी कोई-न-कोई रचनात्मक योगदान दें, तो देश अवश्य नई ऊंचाइयों को पार करेगा।

हिंदी समाचार- से जुड़े अन्य अपडेट लगातार प्राप्त करने के लिए लाइक करें हमारा फेसबुक पेज और आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here