NSG मामले पर पीएम मोदी ने रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से की बात, जल्द ही हो सकती है मुलाक़ात

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दिल्ली- बीते सप्ताह पीएम मोदी अपनी 5 देशों की यात्रा ख़त्म कर भारत लौटे है | पीएम मोदी की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दुनिया भर के देशों का एनएसजी मामले में भारत की तरफ मिलाना | प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का असर यह हुआ है कि NSG का विस्तार न होने के मामले पर अडे स्विटजरलैंड और मैक्सिकों दोनों ही देशों ने खुलकर भारत का समर्थन किया था | अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सभी एनएसजी देशों से इस बात की अपील की थी वे सभी इस ग्रुप में भारत को शामिल करने पर एक राय हो जाए |

पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से की फोन पर बात –
एनएसजी मामले पर पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की है | हालाँकि रूस ने हमेशा से ही एनएसजी मामले में भारत का समर्थन किया है और संयुक्त राष्ट्र संघ में भी रूस ने हमेशा से ही भारत का ही समर्थन किया है |

क्या-क्या हुई बातें –
रूस के राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि रसियन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने खुद फोन किया था | फोन पर दोनों ही नेताओं ने बाइलेटरल रिलेशन्स को लेकर बातचीत की है, दोनों नेता भारत और रूस के संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाना चाहते है |

बताया यह भी जा रहा है कि एनएसजी मामले पर हाल ही में रूसी राष्ट्रपति और पीएम मोदी जल्द ही किसी दिन मुलाकात भी कर सकते है | इन दोनों ही नेताओं की मुलाकात का मुख्यमकसद भारत और रूस के संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाना है और भारत को एनएसजी की सदस्यता दिलाने के लिए रूस चीन पर दबाव भी डाल सकता है |

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाक़ात कर सकते है पीएम मोदी –
मीडिया में आई ख़बरों के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि 24 जून को सियोल में होने वाली एनएसजी देशों की मीटिंग से पहले पीएम मोदी दुनिया भर के कई बड़े नेताओं से मुलाकात कर सकते है | इन राष्ट्राध्यक्षों में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल है |

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात करने के पीछे पीएम मोदी का एकमात्र उद्देश्य है कि चीन एनएसजी मामले में भारत का विरोध करने की बजाय भारत का समर्थन करे |

पीएम मोदी की नीति के सामने नरम पड़ा चीन-
एनएसजी मिशन पर भारतीय प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और तेजी तथा दुनिया के सभी बड़े देशों द्वारा भारत का समर्थन किये जाने के बाद अलग-थलग पड़ चुके चीन ने अब एनएसजी मुद्दे पर भारत के प्रति नरमी बरती है | अब एनएसजी मुद्दे पर चीन ने नरमी बरतते हुए कहा है कि वो चाहता था कि भारत के समर्थन में आमराय बनाने के लिए और बातें होनी चाहिए थी |

भले ही अमेरिका और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते चीन ने एसएसजी में भारत के संबंध में चुप्पी तोड़ी हो, लेकिन जानकार यही मानते हैं कि इस बार भारत को ग्रुप की सदस्यता मिलना लगभग तय है | हालांकि साल 2008 में अमेरिका से हुए परमाणु करार के बाद भारत को पहले से परमाणु प्रसार में काफी छूट मिलती रही हैं |यही नहीं भारत ने अप्रसार संधि पर अब दस्तखत नहीं किए हैं, बावजूद इसके भारत परमाणु हथियार बनाता रहा है |

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